Gulf Tension : खाड़ी क्षेत्र में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। इराक के बसरा पोर्ट के पास पेट्रोलियम उत्पादों से भरे दो तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की घटना सामने आई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार टैंकर बंदरगाह के पास लोडिंग प्रक्रिया में थे, तभी अचानक हुए विस्फोटों से जहाजों में आग लग गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है, क्योंकि यह इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
छोटी विस्फोटक नावों से किया गया हमला
सुरक्षा अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में बताया है कि हमले के लिए विस्फोटकों से भरी छोटी नावों का इस्तेमाल किया गया। इन नावों को टैंकरों के बेहद करीब पहुंचाया गया, जिसके बाद जोरदार धमाके हुए और आग तेजी से फैलने लगी।
घटना के तुरंत बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा और जहाज पर मौजूद क्रू को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया गया। आग पर काबू पाने में कई घंटे लग गए, जबकि जहाजों के आसपास समुद्री सुरक्षा बढ़ा दी गई।
एक क्रू सदस्य की मौत, कई लोगों को बचाया गया
हमले के दौरान एक क्रू सदस्य की मौत होने की पुष्टि हुई है, जबकि 38 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ लोगों के लापता होने की भी आशंका जताई जा रही है, जिनकी तलाश के लिए समुद्री बचाव टीमों को लगाया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक जहाजों में आग लगने के बाद स्थिति काफी गंभीर हो गई थी, लेकिन समय रहते बचाव अभियान शुरू होने से बड़ी जनहानि टल गई।
ईरान और क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी चिंता
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पूरे खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ है। हाल के दिनों में जहाजों, ऊर्जा ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बढ़ी हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर
ऊर्जा बाजार से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यह इलाका दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचते हैं।
ऐसी स्थिति में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी दबाव बढ़ सकता है।





