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Paddy Lifting Issue : विधानसभा में धान उठाव पर सरकार घिरी, बस्तर के आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली का मुद्दा भी गरमाया

By Newsdesk Admin
16/03/2026
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सीजी भास्कर, 16 मार्च। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को किसानों और आंगनबाड़ी व्यवस्था से जुड़े दो अहम मुद्दों पर सरकार को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना (Paddy Lifting Issue) करना पड़ा। एक ओर सक्ती जिले में धान का उठाव समय पर नहीं होने का मामला सदन में जोरदार ढंग से उठा, तो दूसरी ओर बस्तर संभाग में बड़ी संख्या में बिना भवन चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा गया। दोनों मुद्दों पर मंत्रियों के जवाब के बाद सदन में बहस तेज रही।

Contents
  • धान उठाव रुकने से किसानों के नुकसान का मुद्दा
  • विपक्ष ने कार्रवाई और जवाबदेही पर घेरा
  • बस्तर के आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली पर सवाल
  • मंत्री ने कहा, बजट के अनुसार होंगे काम
  • सरकार पर दोहरे दबाव का दिन

धान उठाव रुकने से किसानों के नुकसान का मुद्दा

विधायक रामकुमार यादव ने सदन में कहा कि सक्ती जिले समेत प्रदेश के कई हिस्सों में 17 जनवरी से धान का उठाव रोक दिया गया, जिसकी वजह से किसानों का धान खुले में पड़ा रहा और बारिश में खराब हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि सक्ती जिले में पर्याप्त राइस मिल होने के बावजूद धान उठाव नहीं होना प्रशासनिक नाकामी को दिखाता है।

इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब देते हुए कहा कि धान की रिसाइक्लिंग रोकने के लिए उठाव को अस्थायी तौर पर रोका (Paddy Lifting Issue) गया था। मंत्री ने सदन को बताया कि सक्ती जिले में 47.41 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी, जिसमें से 44.25 लाख क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है और 3.16 लाख क्विंटल धान का उठाव शेष है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 31 मार्च से पहले शेष धान भी उठा लिया जाएगा।

विपक्ष ने कार्रवाई और जवाबदेही पर घेरा

रामकुमार यादव ने यह भी मुद्दा उठाया कि धान का उठाव नहीं होने से भीगे हुए धान की गुणवत्ता प्रभावित होती है और इसका असर अंततः गरीबों तक पहुंचने वाले राशन पर भी पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि सक्ती जिले में बड़ी मात्रा में धान खराब हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। सदन में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर मंत्री स्वयं रिसाइक्लिंग की आशंका स्वीकार कर रहे हैं, तो उन स्थानों पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी जानी चाहिए।

महंत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि 31 जनवरी तक खरीदी की प्रक्रिया चलनी थी, तो 17 जनवरी के बाद की स्थिति में जिन किसानों के पास टोकन थे, उनके नुकसान का जिम्मेदार कौन होगा। इस पर मंत्री दयालदास बघेल ने स्पष्ट किया कि सरकार ने धान खरीदी नहीं, बल्कि केवल उठाव को रोका था। उनका कहना था कि धान खरीदी 17 जनवरी को बंद नहीं की गई थी।

बस्तर के आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली पर सवाल

सदन में दूसरा बड़ा मुद्दा बस्तर संभाग के आंगनबाड़ी केंद्रों की खराब स्थिति को लेकर उठा। विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि संभाग में 2209 आंगनबाड़ी केंद्र बिना भवन के संचालित (Paddy Lifting Issue) हो रहे हैं। इसके अलावा 1021 भवन जर्जर हालत में हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 3445 केंद्रों में पेयजल की व्यवस्था नहीं है, जबकि 4200 केंद्रों में शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।

लखेश्वर बघेल ने सरकार से पूछा कि जब इतनी बड़ी संख्या में केंद्र बुनियादी सुविधाओं के बिना चल रहे हैं, तब नर्सरी कक्षाएं शुरू करने जैसी योजनाओं को जमीन पर कैसे उतारा जाएगा। उनका कहना था कि वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन अब तक ठोस समाधान सामने नहीं आया।

मंत्री ने कहा, बजट के अनुसार होंगे काम

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब में कहा कि कई आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण के लिए स्वीकृतियां दी जा चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था के लिए भी स्वीकृतियां मिली हैं। हालांकि उन्होंने यह साफ किया कि भवन निर्माण और अन्य विकास कार्य बजट की उपलब्धता के अनुसार कराए जाएंगे।

इस पर विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि 15 साल बीत जाने के बाद भी यदि भवन विहीन और जर्जर केंद्रों की स्थिति नहीं सुधरी, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस मामले में एक स्पष्ट और समयबद्ध कार्ययोजना सामने लाए।

सरकार पर दोहरे दबाव का दिन

सोमवार का विधानसभा सत्र सरकार के लिए दो मोर्चों पर दबाव वाला रहा। धान उठाव के मुद्दे पर सरकार को किसानों के नुकसान और प्रशासनिक जवाबदेही के सवालों का सामना करना पड़ा, जबकि आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली ने ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में बुनियादी सेवाओं की हालत पर बहस छेड़ दी। अब देखना होगा कि इन दोनों मुद्दों पर सरकार आगे क्या ठोस कदम उठाती है।

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