सीजी भास्कर, 25 मार्च। उत्तर प्रदेश में इन दिनों एक नई टेक कंपनी को लेकर सियासी तापमान बढ़ा (Yogi Adityanath AI Deal) हुआ है। मामला है बेंगलुरु की एक उभरती स्टार्टअप कंपनी Puch AI और राज्य सरकार के बीच हुए ₹25,000 करोड़ के समझौता ज्ञापन (MoU) का। इस डील के सामने आते ही जहां सरकार इसे भविष्य की तकनीकी छलांग बता रही है, वहीं विपक्ष इसकी विश्वसनीयता और कंपनी की क्षमता पर सवाल उठा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस समझौते की जानकारी सार्वजनिक की, जिसके बाद यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि यह MoU शुरुआती स्तर का है और पूरी तरह बाध्यकारी नहीं है।
क्या है Puch AI?
Puch AI एक बेंगलुरु आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप (Yogi Adityanath AI Deal) है, जिसकी शुरुआत साल 2025 में हुई। इसे सिद्धार्थ भाटिया और अरिजीत जैन ने मिलकर स्थापित किया। यह प्लेटफॉर्म खास तौर पर WhatsApp आधारित AI असिस्टेंट के रूप में काम करता है, जहां यूजर अपने सवाल टेक्स्ट या वॉयस नोट के जरिए पूछ सकते हैं और जवाब उसी भाषा में प्राप्त कर सकते हैं।
इसकी सबसे बड़ी खासियत मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट है। यूजर हिंदी, अंग्रेजी या किसी भी भारतीय भाषा में इससे बातचीत कर सकता है। इतना ही नहीं, यह एआई यूजर को रियल-टाइम जानकारी, प्रोडक्ट सर्च, फैक्ट चेकिंग, और यहां तक कि इमेज व वीडियो जनरेशन जैसी सुविधाएं भी देता है।
क्या-क्या कर सकता है यह AI?
Puch AI को एक ऑल-इन-वन डिजिटल असिस्टेंट के रूप में डिजाइन किया गया है। उदाहरण के तौर पर:
किसी शहर में चल रहे इवेंट्स की जानकारी देना
बजट के अनुसार ऑनलाइन प्रोडक्ट्स सुझाना
फेक और सही खबर की पहचान करना
वॉयस कमांड पर जवाब देना
लोकल सर्विस या फूड रिकमेंडेशन देना
यानी यह केवल सवाल-जवाब तक सीमित नहीं, बल्कि रोजमर्रा की डिजिटल जरूरतों का समाधान देने की दिशा में काम करता है।
MoU में क्या है खास?
राज्य सरकार और Puch AI के बीच हुए इस समझौते का मकसद उत्तर प्रदेश को AI हब के रूप में विकसित (Yogi Adityanath AI Deal) करना है। इसके तहत AI पार्क, बड़े डेटा सेंटर, AI कॉमन्स और AI यूनिवर्सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम करने की योजना है।
सरकार का मानना है कि इससे राज्य में निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन विपक्ष का कहना है कि एक साल पुरानी कंपनी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देना जोखिम भरा हो सकता है।
क्यों मचा है विवाद?
विवाद की मुख्य वजह कंपनी की उम्र और उसकी वित्तीय स्थिति को लेकर उठ रहे सवाल हैं। विपक्षी दलों ने इस MoU की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि MoU केवल संभावनाओं की जांच के लिए साइन किया गया है और यह बाध्यकारी नहीं है। यदि कंपनी तय शर्तों को पूरा नहीं करती, तो समझौता स्वतः समाप्त हो जाएगा।
आगे क्या?
फिलहाल यह मामला राजनीतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना (Yogi Adityanath AI Deal) हुआ है। एक तरफ सरकार इसे भविष्य की तकनीकी क्रांति की शुरुआत मान रही है, तो दूसरी तरफ सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक नई स्टार्टअप इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभाल पाएगी। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह समझौता उत्तर प्रदेश को AI के क्षेत्र में नई पहचान दिलाता है या सिर्फ एक सियासी मुद्दा बनकर रह जाता है।


