सीजी भास्कर, 14 मई । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित नाकाबंदी की आशंकाओं के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्र सरकार ओमान से गुजरात तक समुद्र के नीचे गैस पाइपलाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेजी से काम कर रही है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 40 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। (Preparations to deal with the Hormuz crisis)
2000 किलोमीटर लंबी होगी पाइपलाइन : Preparations to deal with the Hormuz crisis
प्रस्तावित मिडिल ईस्ट-इंडिया डीप वॉटर पाइपलाइन लगभग 2000 किलोमीटर लंबी होगी। यह पाइपलाइन अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए ओमान को सीधे गुजरात के तट से जोड़ेगी। परियोजना के जरिए प्रतिदिन करीब 31 एमएमएससीएमडी प्राकृतिक गैस भारत तक पहुंचाई जा सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, इस योजना को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इसे पूरा होने में पांच से सात साल का समय लग सकता है।
गहरे समुद्र में बिछेगी पाइपलाइन
सरकारी कंपनियों गेल, इंजीनियर्स इंडिया और इंडियन ऑयल कॉर्प को परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दिए जाने की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि पाइपलाइन समुद्र में करीब 3450 मीटर की गहराई तक बिछाई जा सकती है, जिससे यह दुनिया की सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में शामिल हो सकती है। शुरुआती तकनीकी परीक्षणों में इसे सुरक्षित और व्यवहारिक माना गया है।
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बड़ा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। पाइपलाइन के जरिए भारत को ओमान, कतर, यूएई, सऊदी अरब और अन्य गैस उत्पादक देशों से सीधे गैस आयात करने का विकल्प मिलेगा। इससे एलएनजी स्पॉट मार्केट पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक संकट या समुद्री मार्गों में रुकावट की स्थिति में भी गैस सप्लाई प्रभावित नहीं होगी। (Preparations to deal with the Hormuz crisis)



