Zolfaghar Missile Strike: ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनाव के 28वें दिन हालात और गंभीर हो गए, जब ईरान ने इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर 400 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। इस हमले में खासतौर पर ‘जुल्फिकार’ मिसाइल का इस्तेमाल किया गया, जिसे इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल बताया जा रहा है। IRGC ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ के तहत लगातार कई वेव में हमले किए, जिससे तेल अवीव, हाइफा और दिमोना जैसे इलाकों में नुकसान की खबरें सामने आई हैं। इस पूरे घटनाक्रम को (Middle East Conflict) के नए चरण के रूप में देखा जा रहा है।
जुल्फिकार मिसाइल क्यों बन रही सबसे बड़ा खतरा
जुल्फिकार मिसाइल, फतेह-110 परिवार की एडवांस्ड बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है, जिसे ईरान की IRGC एयरोस्पेस फोर्स ने विकसित किया है। इसकी रेंज लगभग 700 किलोमीटर से लेकर 1000 किलोमीटर तक बताई जाती है, जबकि इसमें 450 से 600 किलोग्राम तक का वारहेड लगाया जा सकता है। सॉलिड फ्यूल टेक्नोलॉजी की वजह से इसे बहुत तेजी से लॉन्च किया जा सकता है, जिससे दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम मिलता है। इस क्षमता को (Ballistic Missile) टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती
इस मिसाइल की सबसे खास बात यह है कि मिड-कोर्स फेज में इसका वारहेड अलग हो जाता है, जिससे इसे ट्रैक करना और रोकना बेहद कठिन हो जाता है। यही वजह है कि Arrow, Patriot और THAAD जैसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम भी इसे पूरी तरह रोकने में संघर्ष कर रहे हैं। इसे (Missile Defense Challenge) के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने आधुनिक रक्षा प्रणालियों की सीमाओं को उजागर कर दिया है।
लंबी दूरी की मारक क्षमता ने बढ़ाई चिंता
जुल्फिकार के अलावा ईरान ने ‘डेजफुल’ मिसाइल का भी इस्तेमाल किया है, जो मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) कैटेगरी में आती है। इसकी रेंज करीब 1000 किलोमीटर है और यह ज्यादा दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है। सॉलिड फ्यूल और हाई-स्पीड टेक्नोलॉजी के कारण इसे लॉन्च करना आसान और प्रभावी माना जाता है। यह (Long Range Strike) क्षमता युद्ध के दायरे को और बड़ा बना रही है।
छिपकर हमला करने की रणनीति
ईरान की इन मिसाइलों को मोबाइल TEL (Transporter-Erector-Launcher) सिस्टम पर तैनात किया गया है, जिससे इन्हें आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर लॉन्च किया जा सकता है। यही वजह है कि लगातार हमलों के बावजूद इन मिसाइल सिस्टम को पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल हो रहा है। इस रणनीति को (Mobile Missile System) का अहम उदाहरण माना जा रहा है।
92% मिसाइल रोकने का दावा, फिर भी बढ़ा दबाव
इजराइल ने दावा किया है कि उसने करीब 92 प्रतिशत मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया, लेकिन इसके बावजूद लगातार हो रहे हमलों ने डिफेंस सिस्टम पर भारी दबाव डाल दिया है। अमेरिकी और इजराइली सेनाओं ने ईरान के प्रमुख मिसाइल उत्पादन केंद्रों को निशाना बनाने की कोशिश भी की है, फिर भी हमले जारी हैं। इससे साफ है कि यह संघर्ष जल्द थमने वाला नहीं है।


