गरियाबंद, 28 मार्च। जिले में पुलिस व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है।
जिला पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने ई-30 टीम के 40 पुलिसकर्मियों का तबादला करते हुए उन्हें अलग-अलग थानों की जिम्मेदारी सौंपी है। यह फैसला न केवल प्रशासनिक कसावट लाने के लिए, बल्कि जांबाज जवानों के अनुभव को आम पुलिसिंग में उपयोग करने के लिए अहम माना जा रहा है। इसे (E-30 Police Transfer) के रूप में देखा जा रहा है।
नक्सल मोर्चे से ‘Anti Naxal Operation’ के हीरो अब जनसेवा में
ई-30 टीम के ये जवान वही हैं, जिन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय तक मोर्चा संभाला और कई बड़े ऑपरेशनों को सफल बनाया।
इनमें ऐसे जवान भी शामिल हैं, जिन्होंने करोड़ों के इनामी नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई। अब यही टीम थानों में तैनात होकर आम जनता की सुरक्षा और समस्याओं के समाधान में योगदान देगी। यह बदलाव (Anti Naxal Operation) से जनसेवा की ओर बड़ा कदम माना जा रहा है।


E-30 टीम का इतिहास, ‘Naxal Free District’ की कहानी में अहम भूमिका
साल 2013 में गठित ई-30 टीम छत्तीसगढ़ की एक विशेष इकाई रही है, जिसे नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए तैयार किया गया था।
जनवरी 2025 में कुल्हाड़ी घाट मुठभेड़ में इस टीम ने 1 करोड़ के इनामी नक्सली चलपति सहित 16 नक्सलियों को मार गिराया था, जो इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। इन अभियानों ने गरियाबंद को (Naxal Free District) बनाने में अहम भूमिका निभाई।
थानों में तैनाती से बढ़ेगा भरोसा, ‘Law and Order’ होगा मजबूत
इन अनुभवी जवानों की थानों में पोस्टिंग से कानून-व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जिन पुलिसकर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में काम किया है, उनका अनुभव अब स्थानीय स्तर पर अपराध नियंत्रण और जनता की सुरक्षा में उपयोगी साबित होगा। यह कदम (Law and Order) को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एसपी का संदेश: वीरता का सम्मान और नई जिम्मेदारी का संतुलन
पुलिस अधीक्षक का यह निर्णय एक तरफ जहां जांबाज जवानों के साहस और समर्पण का सम्मान है, वहीं दूसरी ओर उन्हें नई जिम्मेदारियों के साथ जोड़ने का प्रयास भी है।
लंबे समय तक नक्सल मोर्चे पर तैनात रहने के बाद अब ये जवान समाज के बीच रहकर शांति और सुरक्षा की नई कहानी लिखेंगे।


