सीजी भास्कर 31 मार्च कांकेर जिले में (Naxal Surrender Kanker) के तहत डेडलाइन खत्म होने के ठीक पहले दो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों ने पुलिस के सामने हथियार डालते हुए मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया, जिसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
AK-47 के साथ पहुंचे, पहचान हिड़मे और शंकर के रूप में
सरेंडर करने वाले नक्सलियों की पहचान हिड़मे और शंकर के रूप में हुई है। (Surrender Details) के मुताबिक, इनमें से एक नक्सली अपने साथ AK-47 जैसे घातक हथियार के साथ पुलिस के पास पहुंचा, जो इस सरेंडर को और भी अहम बनाता है।
विजयवाड़ा में टॉप कमांडर ने भी छोड़ा हथियार
इसी बीच आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां शीर्ष माओवादी कमांडर सुरेश उर्फ सोमन्ना ने आठ अन्य कैडरों के साथ आत्मसमर्पण किया। (Top Maoist Surrender) के तहत यह सरेंडर आंध्र प्रदेश के डीजीपी Harish Kumar Gupta के सामने हुआ।
36 साल तक सक्रिय रहा शीर्ष नेता
सोमन्ना उर्फ चेल्लूरी नारायण राव माओवादी संगठन की सेंट्रल कमेटी का सदस्य रहा है और उसने करीब 36 साल तक इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। (Long Maoist Journey) के चलते उसे संगठन के प्रमुख रणनीतिक चेहरों में गिना जाता था।
राजनांदगांव में नक्सली डंप से हथियार बरामद
इधर छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव रेंज में भी सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। (Weapon Recovery) के तहत जंगलों में छिपाए गए नक्सली डंप से AK-47, INSAS राइफल और 46 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं, जो आने वाले समय में बड़ी घटनाओं को रोकने में मददगार हो सकते हैं।
हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने की अपील दोहराई
बस्तर रेंज के आईजी Sundarraj P ने पिछले दिनों सरेंडर करने वाले सभी माओवादी कैडरों के फैसले का स्वागत किया है। (Police Appeal) में उन्होंने बाकी नक्सलियों से भी हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य और सम्मानजनक जीवन अपनाने की अपील की।
सरेंडर के लिए बचे थे सिर्फ कुछ घंटे
अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण और पुनर्वास योजना का लाभ उठाने के लिए नक्सलियों के पास बहुत कम समय बचा था। (Final Hours Warning) के तहत यह साफ किया गया कि यह मौका उनके जीवन को नई दिशा देने का अंतिम अवसर हो सकता है।


