सीजी भास्कर, 2 अप्रैल। कठिन हालात अगर किसी को तोड़ते हैं तो कुछ लोगों को और मजबूत भी बना (Debi Daimary Wrestler) देते हैं। असम की युवा पहलवान Debi Daimary की कहानी इसी जज़्बे की मिसाल है, जिन्होंने संघर्षों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा और आज खेल के मैदान में सफलता हासिल की।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में चमका हुनर
Khelo India Tribal Games में देबी ने महिलाओं की 62 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि उनके वर्षों की मेहनत और त्याग का परिणाम है।
असम के गोलाघाट जिले के एक छोटे से गांव से आने वाली देबी ने बेहद कम उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद उन्होंने चाचा-चाची के साथ रहकर जीवन की कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अपने खेल के सपने को कभी नहीं छोड़ा।
आर्थिक तंगी के बीच किया संघर्ष
कुश्ती की ट्रेनिंग जारी रखने के लिए देबी को कई छोटे-मोटे काम (Debi Daimary Wrestler) करने पड़े। शुरुआत में उन्होंने कम वेतन पर दुकान में काम किया, लेकिन बाद में काजीरंगा के एक रिसॉर्ट में स्विमिंग पूल की देखभाल और सफाई का काम करने लगीं।
दिनभर काम करने के बाद भी वे शाम को सिर्फ दो घंटे निकालकर कुश्ती की प्रैक्टिस करती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका फोकस अपने लक्ष्य पर ही रहा।
कोच के मार्गदर्शन से बदली जिंदगी
देबी के जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात कोच अनुस्तूप नाराह से हुई। उनके मार्गदर्शन में देबी ने कुश्ती की बारीकियां सीखीं और खेल को गंभीरता से अपनाया।
कोच ने न सिर्फ उन्हें ट्रेनिंग दी, बल्कि रहने और काम की व्यवस्था में भी मदद की, जिससे देबी अपने अभ्यास पर ध्यान केंद्रित कर सकीं।
लगातार मेहनत से मिली सफलता
देबी ने 2022 में कुश्ती की शुरुआत की और उसी साल सीनियर चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया। इसके बाद उन्होंने 2024 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।
हाल ही में मिला रजत पदक उनके संघर्ष का बड़ा परिणाम (Debi Daimary Wrestler) है, लेकिन देबी इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य अब स्वर्ण पदक जीतना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना है।
परिवार का साथ बना ताकत
देबी की शादी हो चुकी है और उनके पति बेंगलुरु में नौकरी करते हैं। वे लगातार उनका हौसला बढ़ाते हैं और आर्थिक सहयोग भी करते हैं, जिससे देबी बिना किसी चिंता के अपने खेल पर ध्यान दे पा रही हैं। देबी डायमारी की कहानी यह बताती है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो मुश्किल हालात भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।


