सीजी भास्कर 3 अप्रैल SIM Binding Postponed : भारत सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स जैसे व्हाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) के लिए ‘सिम बाइंडिंग’ (SIM Binding) नियम को अनिवार्य करने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने तकनीकी चुनौतियों और कंपनियों की मांग को देखते हुए इस नियम की समय-सीमा को 31 दिसंबर 2026 तक के लिए बढ़ा दिया है। इस फैसले से उन करोड़ों यूजर्स को बड़ी राहत मिली है जो बिना एक्टिव सिम के भी इन ऐप्स का उपयोग कर रहे हैं।
एप्पल और टेक कंपनियों के विरोध का असर
केंद्र सरकार द्वारा जारी शुरुआती निर्देशों के अनुसार, यह नियम 30 मार्च 2026 से लागू होना था। हालांकि, एप्पल (Apple) जैसी दिग्गज टेक कंपनियों और मेटा (Meta) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। कंपनियों का तर्क था कि ऑपरेटिंग सिस्टम (iOS और Android) के स्तर पर सिम डेटा तक सीधी पहुंच को लेकर गंभीर तकनीकी बाधाएं हैं। इसके अलावा, वेब वर्जन पर हर 6 घंटे में अनिवार्य लॉग-आउट के नियम को भी अव्यवहारिक बताया गया था, जिसे अब ‘रिस्क-बेस्ड एनालिसिस’ में बदल दिया गया है।
क्या है सिम बाइंडिंग और क्यों है जरूरी?
सिम बाइंडिंग एक ऐसी सुरक्षा प्रक्रिया है जिसके तहत कोई भी मैसेजिंग ऐप केवल उसी मोबाइल डिवाइस पर काम करेगा, जिसमें वह सिम कार्ड सक्रिय (Active) रूप से लगा हो जिससे अकाउंट बनाया गया है। दूरसंचार विभाग ने यह निर्देश मुख्य रूप से साइबर अपराधों और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे फ्रॉड को रोकने के लिए जारी किए थे। वर्तमान में सिम हटा देने के बावजूद व्हाट्सएप और टेलीग्राम अकाउंट चलते रहते हैं, जिसका फायदा उठाकर अपराधी अक्सर क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल फ्रॉड को अंजाम देते हैं।
साइबर सुरक्षा की खामियों को भरने का प्रयास
सरकार का मानना है कि सिम बाइंडिंग नियम लागू होने से हर सक्रिय अकाउंट एक लाइव और केवाईसी (KYC) वेरिफाइड सिम से जुड़ा रहेगा, जिससे जालसाजों की पहचान और उन्हें ट्रैक करना आसान हो जाएगा। हालांकि, तकनीकी जटिलताओं और टेस्टिंग की जरूरत को देखते हुए सरकार ने अब कंपनियों को साल के अंत तक का समय दिया है। तब तक यूजर्स बिना किसी व्यवधान के अपने मौजूदा तरीके से इन ऐप्स और इनके वेब वर्जन का इस्तेमाल कर सकेंगे।


