सीजी भास्कर, 08 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर (Fake Nursing College Recognition) आ रही है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार और भारी लापरवाही के मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार दुर्गावती कुंजाम को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। उन पर नर्सिंग कॉलेजों को फर्जी तरीके से मान्यता देने और पैसों के बड़े हेरफेर (वित्तीय अनियमितता) के आरोप लगे हैं। इस निलंबन के बाद से पूरे विभाग में खलबली मच गई है।

शिकायतों के बाद गिरी गाज
जानकारी के मुताबिक, रजिस्ट्रार दुर्गावती कुंजाम के खिलाफ शिकायतों का अंबार लगा हुआ था। उन पर आरोप है कि उन्होंने नियमों की धज्जियां उड़ाकर ऐसे कॉलेजों को हरी झंडी दे दी, जिनके पास न तो ठीक से बिल्डिंग थी और न ही नर्सिंग पढ़ाने के लिए जरूरी सुविधाएं। जांच में यह भी सामने आया है कि काउंसिल के बजट और सरकारी फंड में भी भारी गड़बड़ी की गई है। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो शासन ने बिना वक्त गंवाए उन्हें सस्पेंशन का लेटर थमा दिया।
सत्ता का दुरुपयोग और लापरवाही पड़ी भारी
निलंबन आदेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि रजिस्ट्रार ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और सरकारी काम में घोर लापरवाही बरती। नर्सिंग काउंसिल जैसा संस्थान, जो स्वास्थ्य सेवाओं की नींव तैयार करता है, वहां इस तरह की धांधली को सरकार ने बर्दाश्त नहीं किया। सस्पेंशन के दौरान उनका मुख्यालय संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं (रायपुर) तय किया गया है। अब एक हाई-लेवल कमेटी इस पूरे घोटाले की परतें खोलेगी।
हजारों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़
इस पूरे खेल का सबसे बुरा असर उन हजारों छात्रों पर पड़ा है, जिनका भविष्य इन फर्जी कॉलेजों की वजह से दांव पर लगा था। नियमों के मुताबिक रजिस्ट्रार को खुद ग्राउंड पर जाकर कॉलेजों के मानक चेक करने थे, लेकिन आरोप है कि सारे काम ‘कागजों’ पर ही पूरे कर लिए गए। अब जांच की आंच उन बड़े अफसरों और सफेदपोशों तक भी पहुँच सकती है, जो इस फर्जीवाड़े में रजिस्ट्रार के साथ पर्दे के पीछे से जुड़े हुए थे।


