US-Iran Ceasefire 2026 : अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित संघर्षविराम (Ceasefire) की घोषणा के 24 घंटे बाद भी मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित नहीं हो सकी है। समझौते के बावजूद लेबनान पर इजराइली हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, जिसमें अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। यह तनाव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी बन गया है, क्योंकि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई लाइन ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) पर लगा ताला अब तक नहीं खुला है।
लेबनान पर छिड़ा ‘डिप्लोमैटिक’ युद्ध
संघर्षविराम के बेअसर होने की सबसे बड़ी वजह लेबनान को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच पैदा हुआ विरोधाभास है:
- ईरान का पक्ष: तेहरान का दावा है कि शांति योजना की शर्तों में लेबनान भी शामिल था। ईरान ने दो टूक कहा है कि यदि लेबनान पर हमले नहीं रुके, तो वह समझौते को कचरे के डिब्बे में डाल देगा और युद्धविराम एकतरफा खत्म कर देगा।
- अमेरिका का पक्ष: वाशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था।
- सीरिया की एंट्री: सीरिया ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
होर्मुज स्ट्रेट: वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल
उम्मीद थी कि समझौते के बाद होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही शुरू हो जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।
- टैंकरों का जमावड़ा: दर्जनों तेल टैंकर और मालवाहक जहाज अब भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
- ईरान की चेतावनी: ईरान ने संकेत दिया है कि जब तक उसकी शर्तों (लेबनान पर हमले बंद होना) को नहीं माना जाता, वह होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह संचालित नहीं होने देगा। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।
इजराइल की नाराजगी और अविश्वास
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल इस गुप्त समझौते से बेहद खफा है। बताया जा रहा है कि इजराइली नेतृत्व को समझौते की जानकारी बिल्कुल आखिरी पलों में दी गई थी। इसी असंतोष के कारण इजराइल ने लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई और तेज कर दी है, जिससे समझौते की सफलता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
अविश्वास की खाई हुई और गहरी
मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता किसी कमजोर धागे से बंधा है। अविश्वास और क्षेत्रीय हितों के टकराव ने इस शांति पहल को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। यदि अगले कुछ घंटों में लेबनान में बमबारी नहीं रुकी, तो मिडिल ईस्ट एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध की चपेट में आ सकता है।


