सीजी भास्कर, 10 अप्रैल। दुनिया का ध्यान इस समय मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग (China Taiwan Conflict 2026) पर है, लेकिन इसी बीच चीन ने ताइवान को लेकर एक बड़ी कूटनीतिक चाल चल दी है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी कुओमिनतांग (KMT) की अध्यक्ष चेंग ली-वुन से मुलाकात की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने ठीक वही ‘ट्रंप स्टाइल’ रणनीति अपनाई है, जिसमें किसी देश की सत्ता से टकराव होने पर वहां के विपक्षी नेताओं को तवज्जो दी जाती है। जब वाशिंगटन ईरान के मोर्चे पर व्यस्त है, तब जिनपिंग ने ताइवान की घरेलू राजनीति में सीधा हस्तक्षेप कर अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दे दिया है।
एक दशक बाद बीजिंग पहुंचीं ताइवानी नेता, शांति का दिया संदेश (China Taiwan Conflict 2026)
चेंग ली-वुन पिछले दस वर्षों में चीन की यात्रा करने वाली ताइवान की पहली विपक्षी अध्यक्ष बन गई हैं। ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में हुई इस ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर रहने वाले लोग अंततः एक ही ‘चीनी परिवार’ का हिस्सा हैं।
जिनपिंग ने इसे इतिहास की एक ऐसी निश्चितता बताया जिसे बदला (China Taiwan Conflict 2026) नहीं जा सकता। ताइवान की मौजूदा सरकार जहां चीन के दावों का कड़ा विरोध करती है, वहीं विपक्षी नेता चेंग ली का रुख थोड़ा नरम रहा है। उन्होंने अपनी इस यात्रा को “शांति की यात्रा” बताया और युद्ध से बचने के लिए एक संस्थागत समाधान खोजने की अपील की।
ट्रंप की प्रस्तावित चीन यात्रा से पहले बिछी कूटनीतिक बिसात
यह मुलाकात इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा (China Taiwan Conflict 2026) प्रस्तावित है। चीन ने चेंग ली-वुन को मंच देकर अमेरिका को यह संदेश दिया है कि ताइवान के भीतर भी एक प्रभावशाली वर्ग बीजिंग के साथ संवाद और सहयोग का पक्षधर है। चेंग ने टकराव को दरकिनार कर एक साझा और पारस्परिक रूप से लाभकारी समुदाय बनाने का सुझाव दिया है।
कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चीन ने अमेरिका की पुरानी रणनीति को उसी पर आजमाते हुए ताइवान की राजनीति में ‘बीजिंग समर्थक’ आवाजों को ग्लोबल प्लेटफॉर्म दे दिया है। अब देखना होगा कि ईरान संकट से उबरने के बाद अमेरिका ताइवान में बदलते इन समीकरणों पर क्या रुख अपनाता है।


