सीजी भास्कर, 16 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुआ भीषण बॉयलर ब्लास्ट (Vedanta Plant Blast) अब औद्योगिक सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन गया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 अन्य घायल अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह हादसा तकनीकी खामी और प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा हो सकता है, जिसने कई परिवारों को उजाड़ दिया।
ओवरलोड से बढ़ा दबाव, हुआ विस्फोट
जांच में खुलासा (Vedanta Plant Blast) हुआ है कि 600 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट को 650 मेगावाट तक चलाया जा रहा था, जिससे दबाव बढ़ा और पाइपलाइन लीकेज के कारण धमाका हुआ। औद्योगिक सुरक्षा विभाग की जांच टीम ने पाया कि प्लांट को उसकी क्षमता से ज्यादा चलाया जा रहा था। अचानक लोड बढ़ने से दबाव बढ़ा और पाइपलाइन में लीकेज के कारण यह विस्फोट हुआ। करीब 6 घंटे की जांच के बाद यह संकेत मिले हैं कि उत्पादन बढ़ाने की होड़ में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई।
मजदूरों का आरोप: न सायरन, न अलर्ट
हादसे के वक्त मौजूद मजदूरों का कहना है कि विस्फोट (Vedanta Plant Blast) से पहले कोई सायरन नहीं बजाया गया और न ही कोई अलर्ट जारी किया गया। धमाके के बाद पूरा इलाका धुएं और धूल से भर गया, लेकिन प्लांट प्रबंधन की ओर से तत्काल राहत और बचाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी।
एंबुलेंस नहीं, बसों में भेजे गए घायल
घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए मौके पर एंबुलेंस तक नहीं थी। मजदूरों को बसों में भरकर भेजा गया, जिससे हालात और गंभीर (Vedanta Plant Blast) हो गए। घायल मजदूरों को समय पर चिकित्सा सुविधा न मिल पाना इस हादसे (Vedanta Plant Blast) में सबसे बड़ी लापरवाही के रूप में सामने आया है। मजदूरों ने बताया कि पहले भी टेस्टिंग के दौरान पाइप फटने और गैस लीकेज की घटना हो चुकी थी, लेकिन इस बार उत्पादन के दौरान अचानक हुए ब्लास्ट ने कई जिंदगियां छीन लीं।
2000 मजदूरों में दहशत, प्लांट छोड़कर भागे
हादसे के बाद प्लांट के लेबर क्वार्टर में रहने वाले 2000 से ज्यादा मजदूर डर के कारण अपने घर लौट गए हैं। अब वहां केवल करीब 50 मजदूर ही बचे हैं। मजदूरों का कहना है कि सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है, इसलिए वहां रुकना जोखिम भरा है। इस घटना (Vedanta Plant Blast) के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।
प्रोजेक्ट पर उठे गंभीर सवाल
1200 मेगावाट के इस थर्मल पावर प्रोजेक्ट की शुरुआत 2009 में हुई थी। 2022 में वेदांता लिमिटेड द्वारा अधिग्रहण के बाद एक यूनिट शुरू की गई, जबकि दूसरी अभी निर्माणाधीन है। लगातार मेंटेनेंस और तकनीकी समस्याओं के चलते इस प्लांट (Vedanta Plant Blast) की कार्यप्रणाली पहले से ही सवालों के घेरे में रही है।
जिम्मेदारी तय होना जरूरी
यह हादसा (Vedanta Plant Blast) सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों, प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था की बड़ी विफलता को उजागर करता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।


