सीजी भास्कर, 13 जुलाई। रायपुर में मानसून सत्र की शुरुआत इस बार अलग माहौल (Monsoon Session) में हुई। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सदन के भीतर गंभीरता दिखाई दे रही थी। जनप्रतिनिधियों के बीच एक ही चर्चा थी कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को नई पहचान दिलाने वाली महान कलाकार को किस तरह याद किया जाए। जैसे ही श्रद्धांजलि का प्रस्ताव आया, पूरा सदन भावुक हो उठा।
विधायकों ने खड़े होकर सम्मान व्यक्त किया और पंडवानी की उस विरासत को याद किया जिसने वर्षों तक प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के मंचों तक पहुंचाया। कई सदस्यों ने माना कि उनका जाना केवल एक कलाकार का नहीं, बल्कि लोकपरंपरा के एक पूरे युग का अंत है।
मुख्यमंत्री ने याद किया उनका कला सफर Monsoon Session
मुख्यमंत्री डॉ. विष्णुदेव साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी की कापालिक शैली को नई ऊंचाई दी। अपनी अद्वितीय प्रस्तुति, प्रभावशाली अभिनय और दमदार गायन के माध्यम से उन्होंने लोककला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया। उनकी मंचीय प्रस्तुति दर्शकों को अंत तक बांधे रखती थी और महाभारत के पात्रों को जीवंत बना देती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल रहा। ऐसे समय में जब महिलाओं की भागीदारी इस विधा में बेहद कम थी, उन्होंने परंपरागत सोच को पीछे छोड़ते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। उनके निधन से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को ऐसी क्षति पहुंची है जिसे लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।
विपक्ष ने भी जताया गहरा दुख
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि सदन के इतिहास में यह विशेष अवसर है जब पद्म सम्मान प्राप्त किसी महान विभूति को इस तरह सामूहिक श्रद्धांजलि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरा विधायक दल इस दुख की घड़ी में श्रद्धासुमन अर्पित करता है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपने हुनर से छत्तीसगढ़ की पहचान विश्वभर में स्थापित की। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
संघर्ष से शिखर तक का सफर Monsoon Session
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में पली बढ़ीं डॉ. तीजन बाई ने अपने परिश्रम से पूरी दुनिया में देश का नाम (Monsoon Session) रोशन किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो कठिन हालात के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहता है।
संसदीय कार्यमंत्री केदार कश्यप ने भी कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए पंडवानी गायन को नई पहचान दिलाई। उनके निधन से लोककला जगत ने एक अमूल्य धरोहर खो दी है।
श्रद्धांजलि के बाद स्थगित हुई कार्यवाही
मंत्री गजेंद्र यादव, विधायक किरण सिंह देव, अनुज शर्मा, अनिला भेड़िया, कुँवर सिंह निषाद और भईया लाल कोरसेवाड़ा सहित कई सदस्यों ने भी अपने विचार (Monsoon Session) व्यक्त किए। सभी ने डॉ. तीजन बाई के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।



