सीजी भास्कर, 22 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से एक ऐसा मामला (Abuse of Power) सामने आया है जिसे सुनकर आम जनता में आक्रोश व्याप्त है। जहां एक ओर पूरा प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में है और कई ग्रामीण इलाके पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक सरकारी अधिकारी के पालतू तोते को बचाने के लिए सरकारी तंत्र का घोर लापरवाही देखने को मिला है।
पालतू तोते के लिए बुलाई गई फायर ब्रिगेड
मिली जानकारी के अनुसार, नारायणपुर के ओबीसी बॉयज हॉस्टल के पास स्थित एक ऊंचे पेड़ पर एक अधिकारी का पालतू तोता जाकर बैठ गया था। काफी कोशिशों के बाद भी जब तोता नीचे नहीं उतरा, तो उसे उतारने के लिए आपातकालीन सेवा ‘फायर ब्रिगेड’ को काम पर लगा दिया गया। यह सीधे तौर पर सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग (Abuse of Power) है, क्योंकि दमकल विभाग का कार्य आगजनी जैसी आपात स्थितियों से निपटना होता है, न कि किसी पालतू पक्षी को पिंजरे में वापस लाने के लिए मशक्कत करना।
मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने पेड़ की ऊंचाई तक पानी पहुंचाने के लिए हाई-प्रेशर पाइप का इस्तेमाल किया। तोते को नीचे गिराने या डराने के उद्देश्य से लगातार पानी की तेज बौछारें छोड़ी गईं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान हजारों लीटर स्वच्छ पानी सड़क पर बह गया। काफी देर तक चली इस मशक्कत के बाद आखिरकार तोता नीचे आया और उसे वापस पिंजरे में कैद किया गया, लेकिन इस दौरान हुआ संसाधनों का किया गया दुरुपयोग (Abuse of Power) अब चर्चा का विषय बन गया है।
भीषण गर्मी में पानी की बर्बादी पर भड़के लोग
नारायणपुर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों तापमान काफी बढ़ा हुआ है। जलस्तर नीचे जाने के कारण लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में एक पक्षी के लिए हजारों लीटर पानी बहाना स्थानीय लोगों को नागवार गुजरा है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इंटरनेट यूजर्स ने इसे सरकारी संसाधनों का खुला (Abuse of Power) करार दिया है। लोगों का सवाल है कि क्या दमकल की गाड़ी किसी आम आदमी के पालतू जानवर के लिए इसी तरह तत्काल उपलब्ध होती?
प्रशासनिक गलियारों में इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज है कि आखिर वह अधिकारी कौन है, जिसके एक इशारे पर आपातकालीन सेवाओं को इस काम में झोंक दिया गया। फिलहाल अधिकारी के नाम की पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन जिस तरह से नियम-कायदों को ताक पर रखकर यह कार्रवाई की गई, वह प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त [Abuse of Power] को उजागर करती है।
कांकेर के ‘मोबाइल कांड’ की ताजा हुईं यादें
नारायणपुर की इस घटना ने लोगों को साल 2023 के उस चर्चित मामले की याद दिला दी है, जिसने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। कांकेर जिले के पखांजूर में एक फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास ने अपना एक लाख रुपये का मोबाइल जलाशय से निकालने के लिए पद का (Abuse of Power) करते हुए बांध का लाखों लीटर पानी बहा दिया था।
उस समय भी जल संकट के बीच अधिकारी की इस संवेदनहीनता पर भारी बवाल मचा था। जानकारी के अनुसार, जलाशय में मोबाइल गिरने के बाद उसे खोजने के लिए चार दिनों तक पंप चलाकर पानी निकाला गया, जिससे लगभग 21 से 41 लाख लीटर पानी बर्बाद हुआ था। उस समय शासन ने सख्त कदम उठाते हुए अधिकारी को निलंबित किया था और जल संसाधन विभाग ने उन पर भारी जुर्माना भी लगाया था। आज जब तोते के लिए पानी बहाने का (Abuse of Power) सामने आया है, तो लोग पुराने प्रकरण का उदाहरण देकर अधिकारी पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर छिड़ी बहस
आपातकालीन सेवाओं का उपयोग केवल मानव जीवन की रक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए होना चाहिए। लेकिन छत्तीसगढ़ में बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामले दर्शाते हैं कि कुछ रसूखदार लोग सरकारी संपत्ति को अपनी जागीर समझते हैं। तोते को बचाने की आड़ में किया गया यह (Abuse of Power) न केवल पानी की बर्बादी है, बल्कि उन कर्मचारियों के समय का भी दुरुपयोग है जिन्हें किसी वास्तविक आपात स्थिति के लिए तैनात रहना चाहिए था।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच हो और संबंधित अधिकारी के साथ-साथ दमकल विभाग के उन कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाए, जिन्होंने इस तरह के अनुचित आदेश का पालन किया। सोशल मीडिया पर चल रही बहस में लोग इसे नैतिकता के पतन और सत्ता के नशे में किया गया (Abuse of Power) बता रहे हैं।


