सीजी भास्कर 26 अप्रैल I अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी की जंग एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार विवाद का केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है I (AI war intensifies)
जहां अमेरिकी प्रशासन ने चीनी कंपनियों पर उसकी तकनीक के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। इस मुद्दे ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है और आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकता है।
अमेरिका का बड़ा कूटनीतिक कदम : AI war intensifies
अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने सभी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को निर्देश जारी किए हैं कि वे चीनी AI कंपनियों द्वारा अमेरिकी तकनीक के कथित गलत इस्तेमाल पर चिंता जताएं। यह कदम दिखाता है कि अमेरिका इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है।
DeepSeek समेत कई कंपनियों पर आरोप
अमेरिका ने DeepSeek, Moonshot AI और MiniMax जैसी कंपनियों पर आरोप लगाए हैं कि वे अमेरिकी AI मॉडल से तकनीक लेकर अपने सस्ते मॉडल तैयार कर रही हैं।अमेरिका का दावा है कि ये मॉडल लागत में भले ही सस्ते हों, लेकिन इनमें सुरक्षा और निष्पक्षता के मानकों की कमी हो सकती है।
क्या है AI Distillation, क्यों बना विवाद का कारण
AI Distillation एक ऐसी तकनीक है, जिसमें बड़े और महंगे AI मॉडल के आउटपुट से छोटे और किफायती मॉडल बनाए जाते हैं।OpenAI ने भी पहले चेतावनी दी थी कि कुछ कंपनियां ChatGPT जैसे मॉडलों की क्षमताओं की नकल करने की कोशिश कर रही हैं।अमेरिका का कहना है कि अगर यह प्रक्रिया बिना अनुमति के होती है, तो यह बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन है। (AI war intensifies )
ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से पहले बढ़ा तनाव यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब Donald Trump और Xi Jinping की संभावित मुलाकात की तैयारी चल रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत को प्रभावित कर सकता है और तकनीकी प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है।चीन का जवाब और आत्मनिर्भरता पर जोरचीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वह बौद्धिक संपदा अधिकारों का सम्मान करता है।वहीं, Huawei के चिप्स पर आधारित नए AI मॉडल पेश कर चीन अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में जुटा है। (AI war intensifies )


