सीजी भास्कर, 17 मई। बिलासपुर हाई कोर्ट में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त (Compassionate Appointment) रुख अपनाया। कर्मचारी संगठनों और कानूनी हलकों में इस फैसले को लेकर पूरे दिन चर्चा होती रही। अदालत की टिप्पणी के बाद ऐसे परिवारों को नई उम्मीद मिली है, जो वर्षों से नौकरी के लिए सरकारी और संस्थागत प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
मामला एक ऐसे परिवार से जुड़ा था जिसने कर्मचारी की मौत के तुरंत बाद नियमानुसार आवेदन जमा किया था, लेकिन लंबे समय तक फैसला नहीं होने से परिवार आर्थिक परेशानी में फंसा रहा। अदालत ने सुनवाई के दौरान इस देरी और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
हाई कोर्ट ने बैंक के तर्क पर जताई नाराजगी : Compassionate Appointment
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की एकलपीठ ने कहा कि केवल यह कहकर अनुकंपा नियुक्ति से इंकार नहीं किया जा सकता कि रिक्त पद उपलब्ध नहीं है। अदालत ने माना कि कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने के साथ ही संबंधित पद रिक्त माना जाएगा। न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने यह फैसला संतोष सिन्हा और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से जुड़े मामले में सुनाया।
समय पर किया गया था आवेदन
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उनके पिता बैंक में ऑफिस अटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे और सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था। परिवार ने दो महीने के भीतर ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन जमा कर दिया था। इसके बावजूद बैंक ने वर्षों तक मामला लंबित रखा और बाद में पद खाली नहीं होने का कारण बताते हुए नियुक्ति देने से इंकार कर दिया।
अदालत में रखे गए अहम तर्क
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि परिवार कर्मचारी की मृत्यु के बाद गंभीर आर्थिक संकट में आ गया था। साथ ही यह भी कहा गया कि समान परिस्थितियों में अन्य लोगों को नियुक्ति दी जा चुकी है। सुनवाई के दौरान यह तर्क भी रखा (Compassionate Appointment) गया कि अनुकंपा नियुक्ति नीति का उद्देश्य संकट में फंसे परिवारों को राहत देना है, इसलिए तकनीकी कारणों का सहारा लेकर उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने दिया नियुक्ति का आदेश
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे मामलों में संस्थाओं को संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। अदालत ने बैंक द्वारा जारी पुराने आदेश को निरस्त करते हुए 90 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को किसी भी चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।
फैसले को माना जा रहा अहम नजीर
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण साबित (Compassionate Appointment) हो सकता है जहां संस्थाएं तकनीकी कारण बताकर अनुकंपा नियुक्ति देने से बचती रही हैं। अदालत के इस आदेश को संवेदनशील मामलों में बड़ी टिप्पणी माना जा रहा है।


