सीजी भास्कर, 29 मई : क्या किसी शहर की सरकार में ऐसा भी हो सकता है कि दो धुर विरोधी राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस अपनी पुरानी दुश्मनी भुलाकर एक साथ एक ही जाजम पर बैठ जाएं? छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की अकलतरा नगर पालिका (Akaltara Municipality Dispute) से एक ऐसा ही बेहद आक्रामक और राजनीतिक रूप से चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
अकलतरा नगर पालिका एक बार फिर बड़े विवादों और भारी सस्पेंस के केंद्र में आ गई है, जहां नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षदों के बीच लंबे समय से सुलग रही खींचतान ने अब एक उग्र आंदोलन का रूप अख्तियार कर लिया है। गुरुवार की तपती सुबह अकलतरा की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बीजेपी और कांग्रेस के पार्षदों ने मिलकर नगर पालिका कार्यालय के मुख्य गेट पर एक बड़ा सा ताला जड़ दिया। पार्षदों का यह आक्रामक तेवर नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती दीप्ती रोहित सारथी के खिलाफ एक खुली बगावत बन चुका है, जिसने शहर की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को ठप कर दिया है।
इस बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक गतिरोध के कारण पूरे अकलतरा शहर के नागरिक मूलभूत सुविधाओं और जरूरी कागजी कामों के लिए भटक रहे हैं, लेकिन पार्षदों के गुस्से के आगे दफ्तर का ताला नहीं खुला। सामान्य सभा की बैठक के बाद से शुरू हुआ यह विवाद अब शहर की सत्ता के गलियारों में एक बड़ा तमाशा बन चुका है।
बीजेपी और कांग्रेस के पार्षदों का आरोप है कि नगर पालिका में तानाशाही का माडल चलाया जा रहा है, जहाँ जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस अड़ियल रवैये के खिलाफ पार्षदों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी और मनमानी बंद नहीं होगी, तहाँ तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
बीच में ही छोड़कर भाग गईं अध्यक्ष!
इस पूरे हाई-प्रोफाइल ड्रामे और तालेबंदी की पटकथा तीन दिन पहले ही लिख दी गई थी। जानकारी के मुताबिक, तीन दिन पहले अकलतरा नगर पालिका की सामान्य सभा की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में शहर के विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा होनी थी, लेकिन जैसे ही तालाब गहरीकरण कार्य और प्लेसमेंट कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पटल पर आए, तहाँ माहौल पूरी तरह से गरमा गया। पार्षदों ने इन दोनों ही कार्यों में भारी गड़बड़ी और वित्तीय अनियमिताओं का अंदेशा जताते हुए अध्यक्ष से तीखे सवाल पूछने शुरू कर दिए।
विवाद का मुख्य कारण यह था कि पार्षद (Akaltara Municipality Dispute) तालाब गहरीकरण के सरकारी पैसे के सही उपयोग और प्लेसमेंट कर्मचारियों के वेतन व चयन प्रक्रिया पर पूरी पारदर्शिता चाहते थे। लेकिन चर्चा के दौरान बहस इतनी तीखी और आक्रामक हो गई कि माहौल पूरी तरह बेकाबू हो गया। पार्षदों का आरोप है कि सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय नगर पालिका अध्यक्ष दीप्ती रोहित सारथी बीच बैठक से उठकर चली गईं। अध्यक्ष का इस तरह सदन को बीच में छोड़ देना पार्षदों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का घोर अपमान लगा। इस घटना के बाद से ही दोनों दलों के पार्षदों के भीतर भारी नाराजगी और आक्रोश खौल रहा था, जिसने आज सुबह एक बड़े विस्फोट का रूप ले लिया।
46 डिग्री की गर्मी में दिया धरना
विवाद की आग में घी डालने का काम तब हुआ, जब बिना पुराना विवाद सुलझाए और पार्षदों को भरोसे में लिए बिना आज सुबह दोबारा सामान्य सभा की बैठक बुला ली गई। अध्यक्ष के इस फैसले से नाराज और आक्रोशित पार्षद तय समय से सुबह ही भारी संख्या में नगर पालिका कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने अंदर जाने के बजाय सीधे मुख्य द्वार पर मजबूत ताला लटका दिया और दफ्तर के बाहर ही टेंट लगाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
छत्तीसगढ़ में इस समय पड़ रही भीषण और झुलसाने वाली गर्मी के बावजूद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के पार्षद एकजुट होकर जमीन पर धरने पर बैठे रहे। पार्षदों ने नगर पालिका प्रशासन और अध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उन पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगाए। अकलतरा की राजनीति के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला और अनूठा माडल (Akaltara Municipality Dispute) देखने को मिल रहा है, जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद अपने आपसी मतभेदों को दरकिनार कर एक स्थानीय मुद्दे पर कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि यह लड़ाई किसी दल की नहीं, बल्कि अकलतरा की जनता के पैसे की सुरक्षा की लड़ाई है।
कलेक्ट्रेट और पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
नगर पालिका कार्यालय (Akaltara Municipality Dispute) के मुख्य गेट पर ताला जड़े जाने और पार्षदों द्वारा उग्र प्रदर्शन किए जाने की खबर जैसे ही बिजली की रफ्तार से फैली, तहाँ स्थानीय पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों के पसीने छूट गए। आनन-फानन में पुलिस की एक बड़ी टीम दफ्तर के बाहर तैनात की गई ताकि स्थिति और ज्यादा न बिगड़े। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर धरने पर बैठे पार्षदों को समझाने-बुझाने की काफी कोशिश की।
प्रशासनिक अधिकारियों ने पार्षदों से बातचीत का रास्ता निकालने और ताला खोलकर मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने का कड़ा प्रयास किया, लेकिन पार्षद अपनी मांगों पर अड़े रहे। वे तालाब गहरीकरण और प्लेसमेंट कर्मचारियों के मामले में उच्च स्तरीय जांच और अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस आक्रामक राजनीतिक माडल (Akaltara Municipality Dispute) ने जिला प्रशासन के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और सस्पेंस से भरा होगा कि नगर पालिका अध्यक्ष पार्षदों के इन तीखे तीरों का सामना कैसे करती हैं और इस गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार क्या बड़ा कदम उठाती है।




