सीजी भास्कर, 23 अप्रैल : छत्तीसगढ़ में एक मासूम हाथी शावक (Baby Elephant Death Case) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है, जिसने वन विभाग के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों को भी चिंतित कर दिया है। यह पूरा मामला लैलूंगा वन परिक्षेत्र का है, जहां सुबह के समय हाथियों की निगरानी कर रहे हाथी मित्र दल को जंगल के भीतर एक बेबी एलिफेंट का शव मिला। जैसे ही इस घटना की जानकारी सामने आई, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
मिली जानकारी के अनुसार, रायगढ़ जिले के लैलूंगा वन परिक्षेत्र मेंबुधवार की सुबह हाथी मित्र दल के सदस्य नियमित रूप से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लैलूंगा रेंज के चिल्कागुड़ा और अंडोडेरा क्षेत्र में ट्रैकिंग कर रहे थे। इसी दौरान कक्ष क्रमांक 176 आरएफ के भीतर उन्हें एक छोटे हाथी (Baby Elephant Death Case) का शव पड़ा हुआ दिखाई दिया। यह दृश्य बेहद मार्मिक था, क्योंकि शावक बेहद कम उम्र का प्रतीत हो रहा था।
घटना (Baby Elephant Death Case) की सूचना तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद एसडीओ, रेंजर और अन्य वनकर्मी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि हाथी शावक के शरीर पर किसी भी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए, जिससे यह मामला और अधिक रहस्यमय बन गया।
वन विभाग द्वारा मौके पर ही शव का पंचनामा तैयार किया गया और पशु चिकित्सकों की टीम को बुलाकर पोस्टमार्टम कराया गया। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। इसके बाद शावक के शरीर से विभिन्न सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए बरेली स्थित लैब भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा।
13 दिनों से हाथियों का झुंड कर रहा विचरण
वन अधिकारियों के अनुसार, जिस क्षेत्र में यह घटना हुई है, वहां पिछले कुछ दिनों से 13 हाथियों (Baby Elephant Death Case) का एक झुंड लगातार विचरण कर रहा है। इस झुंड में 4 से 5 छोटे शावक भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि मृत शावक इसी झुंड का हिस्सा था और संभवतः यह सबसे छोटा था। इसकी उम्र लगभग एक माह से भी कम बताई जा रही है, जिससे इसकी मौत को लेकर संवेदनशीलता और भी बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने छोटे शावक की मौत कई कारणों से हो सकती है, जिनमें प्राकृतिक बीमारी, संक्रमण, पोषण की कमी या फिर मौसम में बदलाव शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बिना वैज्ञानिक जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है। वन विभाग भी इस मामले में किसी तरह की लापरवाही से इनकार कर रहा है और हर पहलू से जांच की बात कह रहा है।
मौत का कारण स्पष्ट नहीं
लैलूंगा सबडिविजन के एसडीओ एमएल सिदार ने बताया कि सूचना मिलते ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी आवश्यक कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि अभी तक मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि किसी प्रकार का संक्रमण इसकी वजह हो सकता है। फिलहाल सैंपल को जांच के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इस घटना ने एक बार फिर जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर छोटे शावकों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर वन विभाग को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत महसूस की जा रही है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि जंगलों में बढ़ती मानवीय गतिविधियों और पर्यावरणीय बदलावों का असर वन्यजीवों पर पड़ रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फिलहाल वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है और हाथियों के इस झुंड की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी अन्य शावक को कोई नुकसान न पहुंचे। जैसे ही लैब रिपोर्ट सामने आएगी, इस पूरे मामले का खुलासा होने की उम्मीद है। (Baby Elephant Death Case)


