रिपोर्टर – ऐश कुमार साहू
सीजी भास्कर, 07 जुलाई। वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से बलौदाबाजार जिले का बारनावापारा वन्यजीव अभयारण्य 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए हर वर्ष यह निर्णय लिया जाता है। हालांकि अभयारण्य बंद रहने के बावजूद पर्यटक अब आसपास के बफर क्षेत्रों में प्रकृति, संस्कृति और विरासत का आनंद ले सकेंगे।
बलौदाबाजार वनमंडल ने पर्यटकों के लिए “बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट : द सेक्रेड गारलैंड” (Baranawapara Tourism Circuit) की शुरुआत की है। इस पहल के तहत रायपुर के आसपास स्थित प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
बफर क्षेत्रों में घूम सकेंगे पर्यटक
नए पर्यटन सर्किट में सिरपुर, धसकुंड जलप्रपात, तुरतुरिया ईको कल्चरल सेंटर, गिरौदपुरी धाम, सिद्धखोल जलप्रपात, सोनाखान, शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक, देवपुर नेचर कैंप, अचानकपुर का देव हिल्स ईको एथनिक स्टे और कोडार जलाशय जैसे प्रमुख स्थल शामिल किए गए हैं। इन स्थानों पर पर्यटक हरियाली से भरे जंगल, झरने, पहाड़ियां, धार्मिक स्थल, पुरातात्विक धरोहर और जनजातीय संस्कृति का अनुभव कर सकेंगे।
मानसून में बढ़ेगी प्राकृतिक सुंदरता
बारिश के मौसम में बारनावापारा क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और भी निखर जाती है। हरियाली से ढकी पहाड़ियां, बहते झरने और वन क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। इस दौरान देवपुर नेचर कैंप, देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, सिद्धखोल जलप्रपात, तुरतुरिया धाम, धामनी ईको विलेज, धसकुंड फॉल और सिरपुर प्रमुख पर्यटन केंद्र रहेंगे।
रोजगार और सतत पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
वन विभाग इस पर्यटन सर्किट को देशभर में पहचान दिलाने के लिए टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों, ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और नेचर फोटोग्राफर्स को जोड़ रहा है। इस पहल का उद्देश्य जिम्मेदार और सतत पर्यटन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की योजना है।
प्रकृति, संस्कृति और विरासत को जोड़ने की पहल
वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार यह पहल प्रकृति, संस्कृति, विरासत और स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अभयारण्य बंद रहने की अवधि में भी पर्यटक बारनावापारा–सिरपुर बफर क्षेत्रों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का आनंद ले सकेंगे। स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाकर सतत पर्यटन और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।



