सीजी भास्कर, बस्तर, 22 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बस्तर की अनूठी परंपराओं और 75 दिनों तक चलने वाले विश्वप्रसिद्ध दशहरे को देखने के लिए अब विदेशों (Bastar Dussehra Foreign Tourists) से भी पर्यटक पहुंच रहे हैं। बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने के लिए डेनमार्क से चार पर्यटकों का दल यहां पहुंचा है। उन्हें यहां की आदिवासी संस्कृति, ग्रामीण जीवनशैली और स्थानीय लोगों का व्यवहार काफी पसंद आ रहा है। पर्यटकों ने कहा कि बस्तर के गांवों में रहने वाले लोग बहुत मिलनसार हैं और यहां का अनुभव उनके लिए खास है।

बस्तर की सादगी आई पसंद
डेनमार्क से आए पर्यटकों ने बताया कि वे पहली बार छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचे हैं। इसलिए यहां की संस्कृति और परंपराओं को लेकर वे काफी उत्साहित हैं। उन्हें बस्तर के लोग अच्छे और मिलनसार लगे। पर्यटक यहां के ऐतिहासिक दशहरे का आनंद ले रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों और आदिवासी समुदाय की जीवनशैली उन्हें आकर्षित कर रही है। बस्तर दशहरे (Bastar Dussehra Foreign Tourists) को करीब से देखने के साथ ही वे यहां की संस्कृति को समझने की कोशिश भी कर रहे हैं।
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भाषा अलग, फिर भी जुड़ाव
विदेशी पर्यटकों और स्थानीय ग्रामीणों की भाषा भले ही अलग है, लेकिन आपसी बातचीत में यह बड़ी बाधा नहीं बन रही है। चेहरे के भाव, हाव-भाव और इशारों के जरिए भी वे एक-दूसरे की बात समझने की कोशिश कर रहे हैं। कठिन बातों को समझने में स्थानीय नागरिक उनकी मदद कर रहे हैं और गाइड की भूमिका निभा रहे हैं।
विदेशी पर्यटक उलरिक हेल्लिंग ने बताया कि वे लोगों के हाव-भाव और इशारों से भी काफी कुछ समझ पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे पहले भी भारत आ चुके हैं, लेकिन बस्तर पहली बार आए हैं। यहां का अनुभव उन्हें अच्छा लगा है और संभव है कि वे दोबारा भी बस्तर आना चाहें। बस्तर के लोगों (Bastar Dussehra Foreign Tourists) का सहयोग और अपनापन उनके लिए यादगार अनुभव बन रहा है।
16 दिनों का भारत दौरा
डेनमार्क से आए चार सदस्यों का दल 16 दिनों के लिए भारत आया है। इस दौरान बस्तर दशहरा उनके भ्रमण का प्रमुख आकर्षण है। बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को देखने के बाद दल पड़ोसी राज्य ओडिशा की संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता को भी करीब से देखने की योजना बना रहा है। इस यात्रा में पर्यटक अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं और जीवनशैली को जान रहे हैं। बस्तर दशहरा (Bastar Dussehra Foreign Tourists) उनके भारत दौरे का खास हिस्सा बना हुआ है।
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आदिवासी संस्कृति ने खींचा ध्यान
बस्तर अपनी विशिष्ट आदिवासी परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक दशहरा आयोजन के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले विदेशी पर्यटक स्थानीय जीवनशैली और ग्रामीण संस्कृति को करीब से देख रहे हैं। डेनमार्क से पहुंचे पर्यटकों को भी यहां के आदिवासी समुदाय और गांवों का माहौल आकर्षक लगा है।
भाषा अलग होने के बावजूद स्थानीय लोगों का अपनापन, चेहरे के भाव और सांस्कृतिक रंग विदेशी मेहमानों को बस्तर से जोड़ रहे हैं। बस्तर की संस्कृति (Bastar Dussehra Foreign Tourists) उनके लिए केवल एक उत्सव देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के लोगों और उनकी परंपराओं को समझने का अवसर भी है।
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