सीजी भास्कर, नारायणपुर, 22 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ की पहचान अब धीरे-धीरे बदल रही है। कभी नक्सलवाद के प्रभाव के कारण बाहरी लोगों की पहुंच से दूर रहे इस इलाके की प्राकृतिक खूबसूरती अब लोगों को आकर्षित कर रही है। नारायणपुर जिले के ग्राम गारपा के पास स्थित जलप्रपात (Garpa Waterfall Abujhmarh) इन दिनों स्थानीय युवाओं और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के बीच चर्चा में है। पहाड़ियों से उतरता साफ पानी, प्राकृतिक कुंड और चारों ओर फैली हरियाली इस जगह को खास बनाते हैं। लेकिन यहां बढ़ती आवाजाही के बीच कचरा फैलने से इस अनछुए प्राकृतिक स्थल की सुंदरता पर खतरा भी मंडराने लगा है।

कहां स्थित है गारपा जलप्रपात
गारपा जलप्रपात (Garpa Waterfall Abujhmarh) नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर ग्राम गारपा में स्थित है। यह बीएसएफ कैंप के पीछे मौजूद है और कैंप से लगभग 200 मीटर की दूरी पर है। आकार में छोटा होने के बावजूद यह जलप्रपात अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण लोगों का ध्यान खींच रहा है। नारायणपुर जिले में कच्चापाल जलप्रपात के बाद अब गारपा का यह झरना भी स्थानीय स्तर पर चर्चा में आया है। इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं, जिससे यहां पहुंचने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है।
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पहाड़ियों से उतरता साफ पानी
घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बहती जलधारा जब चट्टानों से नीचे बने प्राकृतिक कुंड में गिरती है, तो यहां का दृश्य मनमोहक हो जाता है। कुंड का पानी इतना साफ दिखाई देता है कि उसकी तलहटी तक नजर आती है। पानी में छोटी मछलियों और अन्य जलीय जीवों को भी देखा जा सकता है। आसपास के पेड़ों की हरियाली और खुले आसमान का प्रतिबिंब पानी पर पड़ता है। धूप और प्राकृतिक वातावरण के कारण पानी कभी नीली तो कभी हरे रंग की आभा लिए दिखाई देता है। गारपा जलप्रपात (Garpa Waterfall Abujhmarh) की यही प्राकृतिक विशेषताएं इसे दूसरे पर्यटन स्थलों से अलग पहचान देती हैं।

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सोशल मीडिया से बढ़ी लोकप्रियता
स्थानीय युवा और कंटेंट क्रिएटर्स इस जलप्रपात की तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। इससे गारपा के इस प्राकृतिक स्थल के बारे में अधिक लोगों को जानकारी मिल रही है। शहरों के शोर-शराबे से दूर यहां जंगलों के बीच बहते पानी की आवाज और पहाड़ियों से आती ठंडी हवा सुकून का एहसास कराती है। प्रकृति के करीब समय बिताने के इच्छुक लोगों के लिए यह जगह आकर्षण का केंद्र बन रही है।
नक्सलवाद के कारण रहा दूर
स्थानीय लोगों के मुताबिक, गारपा का यह जलप्रपात वर्षों से मौजूद है, लेकिन नक्सलवाद के प्रभाव और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण लंबे समय तक आम लोगों के बीच इसकी पहचान नहीं बन पाई। क्षेत्र में हालात बदलने के साथ अब लोगों की ऐसे प्राकृतिक स्थलों तक पहुंच बढ़ रही है।
गारपा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर हेमंत साहू ने बताया कि कई साल से नौकरी करने के बावजूद उन्हें इस खूबसूरत जलप्रपात की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वह पहली बार यहां पहुंचे हैं और इस नजारे को देखकर आश्चर्यचकित हैं। नारायणपुर निवासी बलवीर भारती भी सोशल मीडिया पर जलप्रपात को देखने के बाद यहां पहुंचे। उनके मुताबिक, पहले नक्सलियों के डर के कारण आसपास के इलाकों में आवाजाही करना मुश्किल था, लेकिन अब परिस्थितियों में बदलाव दिखाई दे रहा है।
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पर्यटकों की लापरवाही बढ़ा रही चिंता
गारपा जलप्रपात (Garpa Waterfall Abujhmarh) की लोकप्रियता बढ़ने के साथ यहां गंदगी फैलने की समस्या भी सामने आ रही है। कुछ लोग खाने-पीने की सामग्री लेकर आते हैं, लेकिन इस्तेमाल के बाद खाली पॉलिथीन, प्लास्टिक की बोतलें और दूसरे कचरे को वहीं छोड़ देते हैं। कुछ स्थानों पर शराब की बोतलें भी फेंकी हुई दिखाई देती हैं। यदि इस तरह कचरा फैलता रहा, तो साफ पानी और आसपास की हरियाली प्रभावित हो सकती है। प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट जल की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकते हैं और जलीय जीवों के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं।
स्थानीय युवाओं ने की अपील
स्थानीय युवक बलवीर भारती ने लोगों से अपील की है कि वे गारपा जलप्रपात घूमने जरूर आएं, लेकिन इसकी स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निभाएं। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को अपने साथ कचरा रखने के लिए बैग लाना चाहिए और खाने-पीने की सामग्री से निकले रैपर, खाली बोतलें तथा अन्य कचरा वापस ले जाना चाहिए। प्राकृतिक स्थल की सुंदरता बनाए रखने के लिए केवल प्रचार करना पर्याप्त नहीं है। यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना होगा कि जंगल, पहाड़, पानी और वहां रहने वाले जीव-जंतु एक-दूसरे से जुड़े हैं। छोटी-सी लापरवाही भी लंबे समय में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकती है।
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विकास के साथ संरक्षण जरूरी
गारपा जलप्रपात अबूझमाड़ में हो रहे बदलाव की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। जिस क्षेत्र को लंबे समय तक नक्सलवाद के प्रभाव के कारण सीमित पहचान मिली, वहां अब प्राकृतिक संपदा से जुड़े नए स्थल लोगों के सामने आ रहे हैं। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कौशल विकास के साथ यदि प्राकृतिक विरासत को भी उचित पहचान मिले, तो क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, इसके लिए पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को प्राथमिकता देना जरूरी है।
गारपा जलप्रपात (Garpa Waterfall Abujhmarh) की असली खूबसूरती उसके साफ पानी, हरियाली और शांत वातावरण में है। इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि पर्यटक यहां घूमने के बाद कचरा छोड़ने के बजाय अपने साथ वापस ले जाएं।
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