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Home » सावधान …..❗ गोल गप्पे या पानीपुरी से हो सकता है कैंसर का ख़तरा….❓ खाद्य सुरक्षा विभाग ने दी चेतावनी, कहा – पानी पुरी में कुछ ऐसी चीज़ें मिलाई जाती हैं, जिनसे कैंसर का ख़तरा हो सकता है… पढ़िए पूरी खबर

सावधान …..❗ गोल गप्पे या पानीपुरी से हो सकता है कैंसर का ख़तरा….❓ खाद्य सुरक्षा विभाग ने दी चेतावनी, कहा – पानी पुरी में कुछ ऐसी चीज़ें मिलाई जाती हैं, जिनसे कैंसर का ख़तरा हो सकता है… पढ़िए पूरी खबर

By Newsdesk Admin
14/07/2024
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सीजी भास्कर, 14 जुलाई। गोलगप्पे या पानीपुरी भारतीयों के पसंदीदा स्ट्रीट फूड्स में शुमार हैं, किसी भी मार्केट में चले जाइए, पानीपुरी के स्टॉल के आसपास आपको ग्राहकों की भीड़ हमेशा नज़र आएगी। क्या महिलाएं क्या पुरूष, गोल गप्पे का जिक्र ही आपके मुंह में पानी ला देता है। कोरोना महामारी के दौर में लॉकडाउन में लोगों ने घरों में ही अपने पसंदीदा स्ट्रीट फूड को बनाने शुरू कर दिए थे। Google इंडिया के डेटा के अनुसार लॉकडाउन के दौरान पानीपुरी की रेसिपी के सर्च में 107 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी लेकिन अब पानीपुरी के बारे में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बीबीसी की एक पड़ताल रिपोर्ट में पानीपुरी में कुछ ऐसे ख़तरनाक तत्व मिले हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। यह रिपोर्ट कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा विभाग के एक सर्वे के अनुरूप है जिसमें पाया गया कि पानीपुरी में कुछ ऐसी चीज़ें मिलाई जाती हैं, जिनसे कैंसर का ख़तरा हो सकता है।

खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक़ सिर्फ़ पानीपुरी ही नहीं बल्कि दूसरे स्ट्रीट फूड्स में भी कुछ ऐसी चीज़ों का इस्तेमाल होता है, जिनसे कैंसर होने की आशंका रहती है। पानीपुरी के पानी में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल ख़तरनाक है। कर्नाटक सरकार की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक़ उसके खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले पांच महीनों में हज़ार खाद्य नमूनों की जांच की है, इनमें पानीपुरी के 260 सैंपल थे जिनमें से 22 फीसदी में ऐसे तत्व थे जिनसे कैंसर हो सकता है। इनमें से 41 नमूनों में कृत्रिम रंग और कार्सिनोजेनिक तत्व पाए गए। कार्सिनोजेनिक तत्वों से कैंसर हो सकता है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल करने वाले होटलों और ठेलों पर कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान पता चला कि पानीपुरी में इस्तेमाल होने वाले पानी में रंगों का कृत्रिम रंग का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा कबाब, पत्तागोभी मंचूरियन, शवरमा जैसे व्यंजनो में भी कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जाता था जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होते हैं। कर्नाटक में इन डिशेज में कृत्रिम रंगों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

कर्नाटक खाद्य सुरक्षा आयुक्त के श्रीनिवास ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से हाल ही में बताया था कि जांच के दौरान पाया गया कि कुछ लोगों को स्ट्रीट फूड खाने के बाद दस्त, उल्टी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हुईं। फिर जुलाई में हुई जांच से पता चला कि पानीपुरी में कैंसर को न्योता देने वाले ख़तरनाक तत्व हैं। इनमें लोगों की सेहत के लिए ख़तरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लिए गए नमूनों में टारट्राज़िन, सनसेट येलो, रोडामाइन बी और ब्रिलियंट ब्लू रंग पाए गए, ये कैंसर या किडनी के ख़राब होने का कारण बन सकते हैं।कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कॉटन कैंडी, मंचूरियन और कबाब में कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है लेकिन अब पानीपुरी में भी ख़तरनाक तत्व पाए गए हैं। हमने कर्नाटक खाद्य और पोषण विशेषज्ञों से ये जानने की कोशिश की कि फास्ट फूड में इस्तेमाल होने वाला रोडामाइन बी क्या है और ये कितना ख़तरनाक है।पोषण विशेषज्ञ डॉ. रेणुका माइंदे ने बीबीसी मराठी को बताया है कि रोडामाइन बी एक रासायनिक लाल रंग है जिसका उपयोग औद्योगिक रंग के तौर पर किया जाता है। लेकिन चूंकि यह रंग प्राकृतिक रंग से सस्ता होता है, इसलिए इसका उपयोग कैंडी, चिकन टिक्का, पनीर टिक्का में किया जाता है। ऐसे रंगों वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से एलर्जी हो सकती है, आंतों पर असर पड़ सकता है और अस्थमा भी हो सकता है। डॉ. रेणुका पिछले 30 साल से आहार विशेषज्ञ के रूप में काम कर रही हैं। मुंबई, औरंगाबाद, बड़ौदा में काम करने के बाद अब वह नागपुर में काम कर रही हैं।नागपुर विश्वविद्यालय में फूड टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट कल्पना जाधव बताती हैं कि खाद्य पदार्थों को आकर्षक बनाने के लिए केसर का इस्तेमाल करना चाहिए, लेकिन अब प्राकृतिक रंगों की जगह कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जाने लगा है। रसमलाई, मिठाई समेत कई खाद्य पदार्थों में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, इनमें कार्सिनोजेनिक होता है। इससे कैंसर का ख़तरा हो सकता है। अजीनोमोटो का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों को आकर्षक दिखाने या भोजन में स्वाद जोड़ने के लिए किया जाता है, इसमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट होता है। अगर इसे सीमित मात्रा में उपयोग किया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है‌ लेकिन अगर अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो यह ख़तरनाक हो सकता है। इससे कैंसर भी हो सकता है। किडनी और आंतों पर दुष्प्रभाव भी पड़ सकता है।

रेणुका माइंदे कहती हैं कि ‘पानीपुरी के पानी का रंग हरा दिखता है, ऐसा माना जाता है कि इसमें हरे रंग का पानी बनाने के लिए पुदीना और धनिया मिलाया जाता है लेकिन, इसमें धनिये और पुदीने का कम इस्तेमाल करते हुए रासायनिक तरीके से तैयार हरे रंग (पीले और नारंगी रंग के साथ मिश्रित हरे रंग को ग्रीन फास्ट एफसीएफ कहा जाता है) मिलाया जाता है। ऐसी पानीपुरी खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है। अक्सर पानी उबाल कर इस्तेमाल नहीं किया जाता है। पानी में बर्फ मिलाने से इसमें ख़तरनाक बैक्टीरिया पनप सकते हैं, इससे दस्त और उल्टी हो सकती है। इसके बावजूद अगर आप पानीपुरी खाना चाहें तो कुछ आपको सावधानी अपनानी चाहिए। दरअसल बाजार में कुछ ठेले भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) सर्टिफाइड होते हैं, इसका मतलब है कि ये ठेले एफएसएसएआई की तरफ़ से निर्धारित मानदंडों का पालन करते हैं। इसलिए ऐसे ठेले पर खाना खाने में स्वास्थ्य ख़राब होने की आशंका कम रहती है। दूसरा हमें कृत्रिम रंगों वाले खाद्य पदार्थ खाने की बजाय खाद्य पदार्थों में खाने योग्य प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए। चुकंदर, पालक, धनिया, गाजर से तैयार रंग खाने और सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं। लेकिन अगर आप नहीं चाहते कि आपकी सेहत पर कोई असर पड़े, तो सबसे अच्छा उपाय है कि आप घर पर पानीपुरी बनाएं।

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