सीजी भास्कर, 20 सितम्बर | छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में BJP Leaders on Naxal Target की हकीकत दिन-ब-दिन और खौफनाक होती जा रही है। पिछले दो सालों में नक्सलियों ने 10 भाजपा नेताओं की हत्या कर दी है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि गांव में रहना अब नेताओं के लिए खतरे से खाली नहीं।
रातें अब कैंपों के साए में
बीजापुर जिले के आवापल्ली गांव में जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसा का घर भाजपा कार्यकर्ताओं का अस्थायी ठिकाना बन गया है। यहां रोजाना शाम होते ही नेता और कार्यकर्ता इकट्ठा होते हैं और सामने बने CRPF कैंप की सुरक्षा में चैन की नींद ले पाते हैं। दिनभर गांव-गांव घूमकर प्रचार करने वाले ये लोग रात ढलते ही पुलिस कैंप के पास लौट आते हैं।
नीलकंठ कक्केम की हत्या ने बढ़ाया डर
बीते महीनों में भाजपा नेता नीलकंठ कक्केम की हत्या के बाद उनके परिवार को गांव छोड़ना पड़ा। यहां तक कि उन्होंने अपने घर से तस्वीरें तक हटा दीं, ताकि नक्सलियों की नज़र न पड़े। इसी तरह वर्तमान मंडल अध्यक्ष तीरथ जुमार बताते हैं कि बीते दो सालों से वह अपने ही घर पर रात नहीं बिता पाए। उनके बच्चे सवाल करते हैं कि पापा घर पर क्यों नहीं रहते, लेकिन जवाब देने में वह असमर्थ रह जाते हैं।
X कैटेगरी की सुरक्षा भी नाकाफी
भाजपा जिला उपाध्यक्ष लव कुमार रायडू को X Category Security मिली हुई है। बावजूद इसके, गांवों में जाने से पहले उन्हें पुलिस मुख्यालय को सूचना देनी पड़ती है। खुद नेता मानते हैं कि वे नक्सलियों के साए में राजनीति कर रहे हैं।
जमीनी हकीकत बनाम दावे
गृह मंत्री अमित शाह ने 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का दावा किया है। लेकिन फिलहाल की तस्वीर बताती है कि BJP Leaders on Naxal Targetअब गांवों से खिसककर पुलिस कैंपों और जिला मुख्यालय तक सिमट चुके हैं। असलियत यही है कि भाजपा नेताओं का राजनीतिक ठिकाना अब न गांव है, न घर… बल्कि कैंप की सुरक्षा दीवारें हैं।



