CG BhaskarCG BhaskarCG Bhaskar
Font ResizerAa
  • ट्रेंडिंग
  • देश-दुनिया
  • राज्य
  • राजनीति
  • खेल
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • धर्म
  • शिक्षा
  • अन्य
Font ResizerAa
CG BhaskarCG Bhaskar
Search
  • ट्रेंडिंग
  • देश-दुनिया
  • राज्य
  • राजनीति
  • खेल
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • धर्म
  • शिक्षा
  • अन्य
Follow US
Home » क्या विधेयकों पर मंजूरी की समय-सीमा तय कर सकता है सुप्रीम कोर्ट…? राष्ट्रपति ने पूछे 14 सवाल

क्या विधेयकों पर मंजूरी की समय-सीमा तय कर सकता है सुप्रीम कोर्ट…? राष्ट्रपति ने पूछे 14 सवाल

By Newsdesk Admin
15/05/2025
Share

सीजी भास्कर, 15 मई। तमिलनाडु सरकार से जुड़े पॉकेट वीटो फैसले पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से 14 सवाल पूछे हैं और राज्यपाल की शक्तियों को स्पष्ट करने का अनुरोध किया है।

Contents
  • राष्ट्रपति ने क्या 14 सवाल पूछे…
  • सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा था…

राष्ट्रपति मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए तमिलनाडु मामले से जुड़े 14 सवाल सुप्रीम कोर्ट को विचारार्थ भेजे हैं। सुप्रीम कोर्ट से इन सवालों पर अपनी राय देने का आग्रह किया है।

राष्ट्रपति ने सवाल किया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट विधेयकों की मंजूरी पर राष्ट्रपति या राज्यपाल के लिए कोई समय-सीमा तय कर सकता है?

दरअसल, तमिलनाडु सरकार ने लंबित विधेयकों पर राज्यपाल आरएन रवि की तरफ से मंजूरी दिए जाने से इनकार करने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने तमिलनाडु के राज्यपाल के फैसले को खारिज कर दिया।

SC के जस्टिस जेपी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने 8 अप्रैल को ऐतिहासिक फैसला सुनाया और पहली बार राष्ट्रपति को विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए समय-सीमा तय कर दी।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फैसले में कहा कि अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति द्वारा किए गए कार्य न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं। आदेश में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 201 के अनुसार, जब कोई विधेयक राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है तो राष्ट्रपति को या तो उस पर सहमति देनी होती है या असहमति जतानी होती है।

हालांकि, संविधान में इस प्रक्रिया के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास ‘पॉकेट वीटो’ का अधिकार नहीं है। यानि वो अनिश्चितकाल तक अपने निर्णय को लंबित नहीं रख सकते। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से सवाल उठने लगे थे। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से औपचारिक राय मांगी है। राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत 14 बेहद अहम सवाल पूछे हैं।

इससे पहले उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई थी। अब राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत रेफेरेंस भेजकर इस पर सुप्रीम कोर्ट की राय मांगी है। इसके जवाब के लिए CJI को पांच जजों की संविधान पीठ का गठन करना होगा।

राष्ट्रपति ने क्या 14 सवाल पूछे…

- अनुच्छेद 200 के तहत किसी विधेयक को प्रस्तुत करने पर राज्यपाल के समक्ष संवैधानिक विकल्प क्या हैं?- क्या राज्यपाल को किसी विधेयक के प्रस्तुत होने पर मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य होना चाहिए?-

अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल द्वारा संवैधानिक विवेकाधिकार का प्रयोग न्यायिक समीक्षा के अंतर्गत आता है या नहीं?

– अनुच्छेद 361 क्या राज्यपाल के कार्यों की न्यायिक समीक्षा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है?-

क्या राज्यपाल के लिए किसी विधेयक पर कार्रवाई के लिए समय-सीमा निर्धारित की जा सकती है?-

अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति द्वारा संवैधानिक विवेकाधिकार का प्रयोग न्यायिक समीक्षा के अंतर्गत आता है या नहीं?

– क्या राष्ट्रपति द्वारा विवेकाधिकार का प्रयोग करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की जा सकती है?

– क्या राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के पास विधेयक भेजने की स्थिति में राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट से राय लेना अनिवार्य है?

– क्या अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राज्यपाल और राष्ट्रपति के निर्णय कानून के प्रभावी होने से पहले न्यायिक समीक्षा के अंतर्गत आते हैं?

क्या विधेयक के कानून बनने से पहले उसकी सामग्री पर न्यायालय विचार कर सकता है?

– क्या अनुच्छेद 142 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल के संवैधानिक आदेशों को बदला जा सकता है?

– राज्य विधानमंडल द्वारा पारित कानून क्या राज्यपाल की स्वीकृति के बिना भी प्रभावी माना जाएगा?

– क्या अनुच्छेद 145(3) के तहत किसी संवैधानिक प्रश्न पर विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट की न्यूनतम पांच न्यायाधीशों वाली पीठ का होना अनिवार्य है?

– क्या अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां सिर्फ प्रक्रिया तक सीमित हैं या substantive कानून के विपरीत आदेश भी जारी किए जा सकते हैं?-

क्या संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत दायर वाद के अलावा, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच विवादों को निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अन्य किसी अधिकार क्षेत्र पर प्रतिबंध है?

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा था…

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि राज्यपाल को विधेयक मिलने के तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होगा. अगर विधानसभा दोबारा वही विधेयक पारित कर भेजती है तो राज्यपाल को एक महीने के अंदर मंजूरी देनी होगी।

राष्ट्रपति को भी उस विधेयकों पर तीन महीने के भीतर निर्णय करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि तीन महीने से ज्यादा की देरी होती है तो उसके उचित कारण दर्ज किए जाने चाहिए और संबंधित राज्य को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।

बेंच ने निर्देश दिया, हम यह निर्धारित करते हैं कि राज्यपाल द्वारा विचारार्थ भेजे गए विधेयकों पर राष्ट्रपति को उस संदर्भ की प्राप्ति की तिथि से तीन महीने के भीतर निर्णय लेना जरूरी है।

Kamalpreet Singh : समय सीमा से लापरवाही पर सख्त रुख, ठेकेदारों पर गिरेगी गाज
क्या आप जानते हैं भिलाई वैशाली नगर विधानसभा में रहते हैं अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर विराट कोहली के Uncle 🔵 टी-20 फायनल मुकाबले के बाद विराट के रिटायरमेंट की घोषणा पर बोले जितेन्द्र कोहली 🟠 देखिए विडियो युवा क्रिकेटर को दिया यह Tips
पेप्सी-कोला को पछाड़ कर 1500 करोड़ का सोडा गटक गए लोग, इस ब्रांड की हुई सबसे ज्यादा बिक्री
Big Break : कर्नाटक में भीषण सड़क हादसा, चार लोगों की दर्दनाक मौत
ऑपरेशन सिंदूर के बाद हाई अलर्ट पर आगरा, ताजमहल की बढ़ाई गई सुरक्षा
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram

ताजा खबरें

5 AI Tools to Increase Productivity : ChatGPT ही नहीं! ये 5 AI टूल्स बदल रहे काम करने का तरीका

सीजी भास्कर, 04 जून। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का…

Lightning wreaks havoc in Chhattisgarh : 3 महिलाओं की मौत, 5 दिन मौसम अलर्ट

सीजी भास्कर, 04 जून। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी…

Aamir khan third marriage : 61 की उम्र में तीसरी बार दूल्हा बनेंगे, 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट संग लेंगे सात फेरे

सीजी भास्कर, 04 जून। बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट…

Action to remove encroachment : अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 34 मकानों को किया ध्वस्त

सीजी भास्कर, 04 जून। जिले में वन भूमि पर…

Illegal liquor sale at Biryani Centre : आबकारी विभाग ने किया भंडाफोड़

सीजी भास्कर, 04 जून। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले…

You Might Also Like

छत्तीसगढ़ट्रेंडिंग

बिलासपुर में 6 लाख की चोरी का खुलासा: MP से दबोचा गया आरोपी, पूरा सामान बरामद

13/08/2025
छत्तीसगढ़ट्रेंडिंग

Train Delay Bilaspur: घंटों लेट चल रहीं ट्रेनें, संतरागाछी हमसफर रात में पहुंची; आजाद हिंद और उत्कल एक्सप्रेस से यात्री परेशान

11/03/2026
ट्रेंडिंगदेश-दुनियामनोरंजन

दीपिका-रणवीर के घर फिर खुशखबरी के संकेत

19/04/2026
Dumper Accident
देश-दुनिया

Dumper Accident : रात में घर के बाहर सो रहा था परिवार, तेज रफ्तार डंपर ने पलभर में उजाड़ दिया सबकुछ

23/05/2026
छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
क्विक लिंक्स
  • ट्रेंडिंग
  • देश-दुनिया
  • राज्य
  • राजनीति
  • खेल
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • अपराध
  • धर्म
  • शिक्षा
  • अन्य

हमारे बारे में

मुख्य संपादक : डी. सोनी

संपर्क नंबर : +91 8839209556

ईमेल आईडी : cgbhaskar28@gmail.com

© Copyright CGbhaskar 2025 | All Rights Reserved | Made in India by MediaFlix
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?