सीजी भास्कर, 31 जुलाई। राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए Cashless Medical Scheme बड़ी राहत लेकर आने वाली है। सरकार ने प्रस्तावित कैशलेस चिकित्सा योजना का प्रारूप तैयार कर लिया है। योजना लागू होने के बाद कर्मचारियों को इलाज के लिए अपनी जेब से खर्च नहीं करना पड़ेगा और मेडिकल प्रतिपूर्ति के लिए लंबे समय तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर भी नहीं लगाने होंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक कर योजना का मसौदा साझा किया है। प्रस्ताव के अनुसार इलाज के खर्च की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं होगी। सुझावों पर अंतिम निर्णय के बाद सरकार योजना लागू करेगी।

मेडिकल बिल के इंतजार से मिलेगी राहत
मौजूदा व्यवस्था में हर साल हजारों सरकारी कर्मचारी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं। इसके बाद उन्हें मेडिकल प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
कई मामलों में फाइलें दो से तीन साल तक लंबित रहती हैं। समय पर समितियों की बैठक नहीं होने से बड़ी संख्या में मेडिकल प्रतिपूर्ति के बिल अटक जाते हैं। कई कर्मचारियों को भुगतान के लिए अदालत तक जाना पड़ता है।
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डिजिटल मेडिकल कार्ड से होगा कैशलेस इलाज
नई Cashless Medical Scheme लागू होने के बाद कर्मचारियों को मोबाइल आधारित डिजिटल मेडिकल कार्ड दिया जाएगा। इससे सूचीबद्ध अस्पतालों में सीधे कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
योजना के तहत सरकारी अस्पताल से रेफरल की अनिवार्यता भी समाप्त करने का प्रस्ताव है। कर्मचारी सीधे पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे और अस्पतालों को तय सरकारी दरों पर भुगतान किया जाएगा।
जेब से खर्च नहीं करना पड़ेगा
नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों को इलाज के लिए पहले अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। साथ ही मेडिकल बिल जमा कराने और प्रतिपूर्ति का लंबा इंतजार भी खत्म होने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी और पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और आसान बनेगी।
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कर्मचारी संगठनों ने दिए अहम सुझाव
स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में कर्मचारी संगठनों ने योजना का स्वागत किया। संगठनों ने मांग रखी कि पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को भी इस योजना का लाभ दिया जाए।
इसके अलावा अधिक से अधिक सरकारी और निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल करने, पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू करने और भर्ती से लेकर स्वीकृति तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का सुझाव भी दिया गया।
सुझावों के बाद लागू होगी अंतिम योजना
सरकार ने कर्मचारी संगठनों से मिले सुझावों पर विचार करने का भरोसा दिया है। सभी पहलुओं पर अंतिम फैसला होने के बाद कैशलेस चिकित्सा योजना लागू की जाएगी।
योजना लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों को इलाज के दौरान आर्थिक परेशानी और मेडिकल प्रतिपूर्ति की लंबी प्रक्रिया से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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