सीजी भास्कर, 18 जून : छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को पूरी तरह नशामुक्त और स्वस्थ समाज में बदलने के लिए अपने नशामुक्ति अभियान (CG Drug De-Addiction Campaign) की रफ्तार तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ शराब व्यसन मुक्ति अभियान (भारत माता वाहिनी योजना) के जमीनी क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीतियों को लेकर आज मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) में राज्य स्तरीय समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक की अध्यक्षता समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार ने की। बैठक में समाज कल्याण विभाग के संचालक रणवीर शर्मा सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ विशेष रूप से मौजूद रहे।
15 बिस्तरों की क्षमता सीधे बढ़कर होगी 50
बैठक में राज्य के भीतर नशामुक्ति और पुनर्वास की बुनियादी व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ तथा सर्वसुविधायुक्त बनाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया। समिति ने इस दौरान दो बेहद क्रांतिकारी और बड़े फैसले लिए हैं:
5 नए जिलों में स्थापना : राज्य के जिन जिलों में फिलहाल सरकारी पुनर्वास केंद्र नहीं हैं, वहां नए केंद्र खोले जाएंगे। इसके तहत छत्तीसगढ़ के 5 जिलों– मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सुकमा, बेमेतरा और कोरबा में नए नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीटों में बंपर बढ़ोतरी : नशा पीड़ित व्यक्तियों के इलाज और बेहतर पुनर्वास के लिए वर्तमान में संचालित 15 बिस्तरों (बैड्स) वाले एकीकृत पुनर्वास केंद्रों की क्षमता को बढ़ाकर सीधे 50 बिस्तर करने का बड़ा सुझाव दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक पीड़ितों को एक समय में इलाज मिल सके।
नई ग्राम पंचायत में बनेगी ‘भारत माता वाहिनी’
इस महा-अभियान को केवल शहरों तक सीमित न रखकर ग्रामीण इलाकों के भीतर तक पहुंचाने के लिए ‘भारत माता वाहिनी योजना’ के विस्तार का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक विकासखण्ड की 1000 से अधिक जनसंख्या वाली जितनी भी नवीन ग्राम पंचायतें हैं, वहां प्राथमिकता के साथ ‘भारत माता वाहिनी’ समूहों का गठन किया जाएगा। ये समूह ग्रामीण स्तर पर स्थानीय लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे और शराब व अन्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने में प्रशासन की मदद करेंगे।
3 साल के खर्च का खुला लेखा-जोखा
नशामुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली में पूरी पारदर्शिता लाने, सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने और गड़बड़ियों को रोकने के लिए अब सभी केंद्रों में अनिवार्य रूप से सीसीटीवी (CCTV) कैमरे और स्टाफ व मरीजों के लिए बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली (Biometric Attendance) स्थापित करने के प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है।
बैठक के दौरान समिति ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2023-24, 2024-25 और 2025-26) के दौरान अभियान के तहत किए गए कार्यों और सरकारी बजट के खर्च की विस्तृत समीक्षा की। इसके साथ ही वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 की नई कार्ययोजना, केंद्रों के लिए आवश्यक डॉक्टरों, काउंसलरों व मानव संसाधन की उपलब्धता तथा प्रशासनिक बजट के प्रस्तावों पर गहनता से विचार-विमर्श किया गया।
विभागीय समन्वय और जनभागीदारी से बनेगा नशामुक्त छत्तीसगढ़
प्रमुख सचिव शहला निगार ने बैठक में साफ तौर पर कहा कि एक नशामुक्त और खुशहाल समाज का निर्माण केवल किसी एक विभाग के भरोसे नहीं किया जा सकता। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर के अभियानों जैसे एनसीओआरडी (NCORD) एवं एनएमबीए (NMBA – नशामुक्त भारत अभियान) के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए समाज कल्याण, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को पुनर्वास सेवाओं की क्वालिटी (गुणवत्ता) सुधारने और जन-जागरूकता कार्यक्रमों को युद्ध स्तर पर चलाने की सख्त हिदायत दी है।





