सीजी भास्कर, 15 सितंबर। एक नवजात शिशु (Child Care) को लेकर बीते कुछ दिनों से अस्पताल में असमंजस की स्थिति बनी रही। कोई उसका हालचाल पूछने नहीं आया और न ही दिए गए संपर्क नंबर काम आए। आखिरकार स्टाफ को समझ नहीं आया कि इस मासूम की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।
दिन गुजरते गए, लेकिन शिशु (Child Care) का परिवार कहीं दिखाई नहीं दिया। अस्पताल प्रशासन ने पहले परिजनों का इंतजार किया, फिर कई स्तरों पर जांच की, लेकिन सब निष्फल रहा। सवाल यही था कि अब इस मासूम का भविष्य क्या होगा और उसे सुरक्षित देखभाल कौन देगा।
टीम ने शिशु (Child Care) की पूरी जिम्मेदारी उठाई और उसे लगातार चिकित्सा देखरेख में रखा। डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ की टीम हर पल इस नवजात की सेहत का ध्यान रखती रही, ताकि बच्चा किसी भी प्रकार की समस्या से न जूझे। इसी बीच अधिकारियों ने उसके आगे की सुरक्षा और (Child Care) के इंतजाम पर विचार करना शुरू किया।
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर, सकरी क्षेत्र का है। 15 अगस्त 2025 को महिला एवं प्रसूति विभाग में कविता (20 वर्ष), पति ओमप्रकाश, निवासी भरनीपरसदा सकरी को प्रसव हेतु भर्ती किया गया था। उसी दिन पुत्र जन्म हुआ और अगले दिन प्रसूता को छुट्टी दे दी गई। परिजन 24 अगस्त तक बच्चे को देखने आते रहे, लेकिन 25 अगस्त के बाद अचानक उनका आना बंद हो गया। दिए गए मोबाइल नंबर भी गलत निकले।
इसके बाद शिशु को शिशु रोग विभाग के NICU वार्ड में रखा गया, जहाँ विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश नाहरेल, डॉ. समीर कुमार जैन, डॉ. सलीम खलखो, डॉ. मीनाक्षी ठाकुर, डॉ. जायकिशोर और नर्सिंग स्टाफ सहित पूरी टीम ने उसकी विशेष देखभाल की। संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के आदेशानुसार 11 सितम्बर से ही शिशु के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
आज औपचारिक रूप से शिशु को (Child Care) चाइल्ड लाइन बिलासपुर को सौंपा गया। इस मौके पर प्रभारी चंद्रशेखर तिवारी, सुपरवाइजर आस्था सिंह, चंद्रप्रकाश श्रीवास और समाजिक कार्यकर्ता विकास साहू (सेवा भारती मातृछाया, बिलासपुर) उपस्थित रहे।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि “नवजात को हर संभव उपचार और सुरक्षा दी गई है। अब उसके बेहतर भविष्य और (Child Care) पुनर्वास के लिए चाइल्ड लाइन को सौंपा गया है, जहाँ उसकी परवरिश और देखभाल की संपूर्ण जिम्मेदारी ली जाएगी।”



