सीजी भास्कर, 27 अगस्त : जजों पर आरोप (CJI Surya Kant Statement) को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका से जुड़े किसी भी मामले में फैसला मीडिया में सामने आए आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी जज पर केवल आरोप लगने से कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
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जस्टिस संदीप मेहता ने लगाए गंभीर आरोप
जस्टिस संदीप मेहता ने CJI को लिखे तीन पत्रों में राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के कार्यकाल को लेकर कथित प्रशासनिक अनियमितताओं और चुनिंदा मामलों की लिस्टिंग से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे। जस्टिस मेहता ने आरोपों की जांच की मांग करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट के प्रमुख के तौर पर किसी अन्य हाई कोर्ट से तत्काल मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की मांग भी की थी। उन्होंने केस लिस्टिंग में कथित हेरफेर के जरिए प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत मुकदमेबाजों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया।
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संस्थागत प्रक्रिया के तहत होगा फैसला
CJI सूर्य कांत ने कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पद पर बनाए रखने, उनका तबादला करने या किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का फैसला सक्षम संस्थागत प्राधिकरण ही करेगा। इसके लिए पूरे मामले पर उचित विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजों से संबंधित निजी शिकायतों का निपटारा मीडिया में एक-दूसरे के खिलाफ किए गए दावों के आधार पर नहीं किया जा सकता। पत्रों में उठाई गई चिंताओं को संज्ञान में लिया गया है, लेकिन इस स्तर पर सार्वजनिक रूप से कोई अंतिम निष्कर्ष देना उचित नहीं होगा।
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सिर्फ आरोप लगने से दोष साबित नहीं होता
CJI ने कहा कि केवल आरोप लगाए जाने से किसी जज को दोषी नहीं माना जा सकता। मामले की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी। इस दौरान जस्टिस संदीप मेहता की ओर से दी गई जानकारी के साथ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का पक्ष भी ध्यान में रखा जाएगा। जजों पर आरोप (CJI Surya Kant Statement) से जुड़े इस मामले में संस्थागत जांच पूरी होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर भी काम
CJI सूर्य कांत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम हाल में हुई कई नियुक्तियों के बाद विभिन्न हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी काम कर रहा है। इसी दौरान जस्टिस मेहता की ओर से भेजे गए पत्रों में उठाई गई चिंताओं पर भी ध्यान दिया गया है।
उन्होंने दोहराया कि न्यायपालिका से जुड़े गंभीर मामलों में पारदर्शिता और संस्थागत प्रक्रिया जरूरी है। किसी भी जज के खिलाफ कार्रवाई उपलब्ध तथ्यों और संबंधित पक्ष के जवाब पर विचार करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की जाएगी।




