सीजी भास्कर, 27 अगस्त : जनवरी 2024 में हुई श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की हिरासत में मौत (Custody Death) के मामले में CBI ने हत्या की FIR दर्ज कर जांच तेज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के 12 अगस्त 2026 के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है। CBI ने सिविल लाइंस थाने में दर्ज FIR नंबर 1036 को जांच का आधार बनाया है। फिलहाल FIR में आरोपी का नाम अज्ञात रखा गया है। यह मामला हिरासत में मौत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने CBI से मांगी जांच रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को 13 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह पता लगाने को कहा है कि श्रवण की हिरासत में मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच के दौरान यदि कोई अधिकारी हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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पुलिस ने शराब के मामले में गिरफ्तार किया था
जानकारी के मुताबिक, ग्राम मोहरा निवासी 35 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी को पुलिस ने 17 जनवरी 2024 को पकड़ा था। अगले दिन पुलिस ने उसे 6 लीटर महुआ शराब के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया। आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर 19 जनवरी को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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जेल में बिगड़ी तबीयत, सिम्स में हुई मौत
21 जनवरी को जेल में श्रवण की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले उसका जेल अस्पताल में उपचार किया गया। हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स अस्पताल रेफर किया गया। 22 जनवरी को सिम्स में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने हिरासत में मौत (Custody Death) के मामले में पुलिस और जेल प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए।
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न्यायिक जांच में सिर की चोट का जिक्र
22 जुलाई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा ने जांच रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में पोस्टमॉर्टम, हिस्टोपैथोलॉजी और FSL रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। मेडिकल जांच में किसी रासायनिक जहर की पुष्टि नहीं हुई थी। रिपोर्ट में मौत की वजह सिर में लगी चोट के कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट बताई गई थी।
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CBI जांच में पुलिस और जेल अधिकारियों की भूमिका
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद CBI न्यायिक जांच रिपोर्ट के साथ पुलिस और जेल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि श्रवण को हिरासत में किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा और उसकी मौत के लिए कोई अधिकारी जिम्मेदार था या नहीं।
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परिजनों को मिलेगा 25 लाख रुपए का मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। मामले में CBI की जांच रिपोर्ट और आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हिरासत में मौत के लिए कौन जिम्मेदार था। फिलहाल हिरासत में मौत (Custody Death) मामले में जांच जारी है।




