सीजी भास्कर, 14 जून : खेती में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए केवल फसल (Crop Harvesting Tips) उगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही समय पर कटाई करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कटाई में जल्दबाजी या अनावश्यक देरी किसानों को 5 से 15 प्रतिशत तक उत्पादन नुकसान पहुंचा सकती है। यदि किसान फसल की परिपक्वता के संकेतों को पहचानकर उचित समय पर कटाई करें तो उपज की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों बेहतर मिल सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि धान सहित अन्य फसलों की कटाई सही समय पर करने से दानों की गुणवत्ता बनी रहती है और उत्पादन हानि की संभावना कम हो जाती है। वहीं समय से पहले या बहुत देर से कटाई करने पर किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फसल पकने के संकेत पहचानना जरूरी
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक जब धान की लगभग 80 से 85 प्रतिशत बालियां पीली या सुनहरी हो जाएं और पौधों की हरियाली लगभग समाप्त हो जाए, तब फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है। किसान दानों को दांत से दबाकर भी इसकी जांच कर सकते हैं। यदि दाना कठोर हो गया है और आसानी से नहीं टूटता, तो कटाई शुरू की जा सकती है।
धान की कटाई जमीन से लगभग 15 सेंटीमीटर ऊपर से करने की सलाह दी जाती है। इससे भूसे की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और खेत में जैविक अवशेष बचने से मिट्टी की उर्वरता को भी लाभ मिलता है।
मौसम और नमी पर रखें विशेष नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि कटाई के समय धान के दानों में 18 से 22 प्रतिशत नमी होना आदर्श माना जाता है। अधिक नमी वाले दानों को भंडारित करने पर फफूंद लगने का खतरा बढ़ जाता है, जबकि अत्यधिक सूखे दाने कटाई और मिंजाई के दौरान टूट सकते हैं। किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। बेमौसम बारिश, तेज हवा और आंधी जैसी परिस्थितियां खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
कटाई के बाद भी बरतें सावधानी
कृषि विभाग के अनुसार कटाई के बाद अनाज को दो से तीन दिन तक अच्छी धूप में सुखाना चाहिए। भंडारण से पहले दानों की नमी 12 प्रतिशत से कम करना आवश्यक है। साथ ही टूटे, खराब और रोगग्रस्त दानों को अलग कर देना चाहिए ताकि संग्रहित अनाज की गुणवत्ता बनी रहे।
विशेषज्ञ साफ, सूखे और हवादार गोदाम में भंडारण करने तथा समय-समय पर कीट एवं फफूंद की जांच करने की सलाह देते हैं। इससे भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगा लाभ
किसानों का कहना है कि आधुनिक कृषि यंत्रों और हार्वेस्टर मशीनों के उपयोग से कटाई का कार्य तेजी से पूरा होता है और मजदूरी लागत में भी कमी आती है। वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान बिना अतिरिक्त खर्च के अपनी आय बढ़ा सकते हैं।





