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Daily Wage Workers Removed Without Order: बगैर आदेश हटाए गए आदिवासी विभाग के कर्मचारी, आज कलेक्टोरेट घेराव की चेतावनी

By Newsdesk Admin
30/01/2026
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सीजी भास्कर, 30 जनवरी | Daily Wage Workers Removed Without Order: आदिवासी विकास विभाग में वर्षों से कार्यरत सैकड़ों दैनिक वेतन भोगियों को बिना किसी लिखित आदेश के काम पर आने से रोक दिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 13 जनवरी को जारी प्रशासनिक निर्देश के बाद जिले के छात्रावास-आश्रमों में कार्यरत कर्मियों को अचानक बाहर कर दिया गया, जिससे विभागीय व्यवस्था के साथ-साथ सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

Contents
  • स्वीकृत पदों से अधिक नियुक्तियों पर कार्रवाई
  • 519 कर्मचारियों को मौखिक रूप से रोका गया
  • कलेक्टर को सौंपे गए कई ज्ञापन
  • संघ का आरोप: वर्षों की सेवा को किया नजरअंदाज
  • नेता-अफसरों के यहां ड्यूटी कराने का दावा
  • भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
  • विभाग का पक्ष: लिखित आदेश के बिना काम मान्य नहीं

स्वीकृत पदों से अधिक नियुक्तियों पर कार्रवाई

जारी पत्र में वर्ष 2014 में निर्धारित शासकीय सेटअप का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि विभागीय संस्थानों में स्वीकृत पदों से अधिक दैनिक वेतन भोगी कार्यरत हैं। इसी आधार पर अधीक्षकों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक माह निर्धारित तिथि तक केवल स्वीकृत पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की ही उपस्थिति रिपोर्ट भेजी जाए, ताकि उसी अनुसार वेतन भुगतान किया जा सके।

519 कर्मचारियों को मौखिक रूप से रोका गया

प्रशासनिक निर्देश के बाद संस्थानों के अधीक्षकों ने स्वीकृत पदों से अतिरिक्त बताए जा रहे 519 कर्मियों को मौखिक रूप से काम पर न आने को कहा। इस अचानक फैसले से कर्मचारी हतप्रभ हैं। कई कर्मचारी ऐसे हैं, जो पिछले 8–9 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे थे और अब उन्हें बिना किसी नोटिस के बाहर कर दिया गया।

कलेक्टर को सौंपे गए कई ज्ञापन

कार्रवाई के विरोध में दैनिक वेतन भोगियों ने संगठित होकर बैठकें कीं और 17 जनवरी व 27 जनवरी को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर पक्ष रखने की मांग की। सुनवाई नहीं होने पर 30 जनवरी को कलेक्टोरेट घेराव की चेतावनी दी गई, जिसके बाद आज बड़े आंदोलन की तैयारी की गई है।

संघ का आरोप: वर्षों की सेवा को किया नजरअंदाज

कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष ने कहा कि कई ऐसे कर्मचारी हैं, जिन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष विभाग की सेवा में दिए हैं। वहीं, हाल में भर्ती हुए लगभग 150 कर्मियों को अब तक 8 महीने का वेतन तक नहीं मिला है। अचानक काम से हटाए जाने से परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के साथ-साथ मानसिक तनाव भी बढ़ गया है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी।

नेता-अफसरों के यहां ड्यूटी कराने का दावा

कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि बिना किसी लिखित आदेश के भर्ती किए गए कुछ कर्मियों से छात्रावास-आश्रम के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य प्रभावशाली स्थानों पर कार्य कराया जा रहा है। कुछ मामलों में नियमित वेतन निकलने की बात भी सामने आई है, जबकि वास्तविक संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों को महीनों से भुगतान नहीं मिला।

भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

बताया जा रहा है कि 2019 में नियमितीकरण के बाद भी विभाग में अतिरिक्त कर्मचारी मौजूद थे। इसके बावजूद 2022 के बाद मौखिक आदेशों पर नई नियुक्तियां की गईं। कई बेरोजगार युवाओं ने नौकरी की उम्मीद में आर्थिक संसाधन तक दांव पर लगा दिए, लेकिन अब वही लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

विभाग का पक्ष: लिखित आदेश के बिना काम मान्य नहीं

आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कलेक्टर के निर्देशानुसार केवल स्वीकृत पदों पर कार्यरत कर्मियों की ही उपस्थिति मान्य होगी और उसी आधार पर वेतन भुगतान किया जाएगा। जो कर्मचारी बिना लिखित आदेश के कार्य कर रहे थे, उन्हें फिलहाल काम पर आने से रोका गया है। वास्तविक संख्या का आकलन रिपोर्ट आने के बाद किया जाएगा।

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