सीजी भास्कर, 21 जून : प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों (Digital Burden on Teachers ) की भारी कमी बनी हुई है। करीब 30 हजार से अधिक पद रिक्त होने के कारण उपलब्ध शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का दबाव है। इस बीच डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन रिपोर्टिंग की बढ़ती व्यवस्था ने शिक्षकों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। हालात यह हैं कि शिक्षकों को पढ़ाई कराने के साथ-साथ 27 से अधिक मोबाइल एप्स और विभिन्न पोर्टलों पर नियमित जानकारी अपलोड करनी पड़ रही है, जिससे कक्षा शिक्षण के लिए मिलने वाला समय लगातार कम होता जा रहा है।
शिक्षक संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य काम को आसान बनाना होना चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में शिक्षक प्रशासनिक कार्यों और डेटा एंट्री में अधिक उलझते जा रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
27 एप्स और कई पोर्टलों पर देनी पड़ती है जानकारी
सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को मिड-डे मील, पुस्तक वितरण, साइकिल वितरण, छात्र उपस्थिति, प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्वास्थ्य सर्वेक्षण, साक्षरता अभियान, चुनावी कार्य और विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित आंकड़े अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करने होते हैं।
कई बार एक ही जानकारी को अलग-अलग एप्स और पोर्टलों पर कई बार भरना पड़ता है। शिक्षकों का कहना है कि दिन का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करने और रिपोर्ट भेजने में निकल जाता है, जबकि उनका मूल कार्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है।
डेटा एंट्री में खर्च हो रहा बहुमूल्य समय
शिक्षकों के अनुसार विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड, व्यक्तिगत जानकारी, परीक्षा परिणाम और योजनाओं से जुड़ी सूचनाएं विभिन्न पोर्टलों पर अपलोड करनी होती हैं। कई बार तकनीकी समस्याओं के कारण एक ही जानकारी को दोबारा दर्ज करना पड़ता है।
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर जानकारी अपलोड नहीं की जाती तो जवाबदेही तय होने का दबाव भी रहता है। ऐसे में शिक्षक लगातार प्रशासनिक और तकनीकी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
30 हजार से अधिक पद खाली, बढ़ा कार्यभार
प्रदेश में हजारों शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण स्कूलों में पहले ही शिक्षकों की कमी महसूस की जा रही है। कई स्कूलों में सीमित संख्या में शिक्षक बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी संभाल रहे हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब एक ही शिक्षक को पढ़ाई, रिकॉर्ड संधारण, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और डिजिटल रिपोर्टिंग जैसे अनेक कार्य एक साथ करने पड़ते हैं तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों ने सुझाया एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या का समाधान एकीकृत डिजिटल प्रणाली विकसित करने में है। यदि स्कूल प्रबंधन, विद्यार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, वितरण योजनाएं और प्रशासनिक गतिविधियां एक ही मंच पर संचालित हों तो शिक्षकों का समय और श्रम दोनों बच सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई राज्यों में इस प्रकार की एकीकृत स्कूल प्रबंधन प्रणाली सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। इससे शिक्षकों को बार-बार डेटा एंट्री से राहत मिलती है और वे अपना अधिक समय अध्ययन-अध्यापन पर केंद्रित कर पाते हैं।
पढ़ाई को प्राथमिकता देने की जरूरत
शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का माध्यम है, लेकिन यदि वही तकनीक शिक्षकों का अधिकांश समय लेने लगे तो उसका उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए ऐसी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है, जिसमें जवाबदेही भी बनी रहे और शिक्षकों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय भी मिल सके।





