सीजी भास्कर, 14 अगस्त। बस्तर में कभी नक्सलियों के मजबूत गढ़ के तौर पर पहचाने जाने वाले कर्रेगुट्टा (Karregutta Tiranga Yatra) की पहाड़ी पर अब तिरंगा लहराने जा रहा है। तिरंगा यात्रा के तीसरे और अंतिम दिन बीजापुर से यात्रा आवापल्ली, उसूर, गलगाम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहुंचेगी। यहां तिरंगा फहराकर यात्रा का समापन किया जाएगा।
कभी जिस इलाके में नक्सलियों की गतिविधियों का दबदबा था, वहां अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी और तिरंगे के साथ नई तस्वीर दिखाई देगी। कर्रेगुट्टा तक तिरंगा यात्रा का पहुंचना बस्तर में बदलते माहौल और शांति के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
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कर्रेगुट्टा कभी था नक्सलियों का मजबूत ठिकाना
छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को जोड़ने वाली कर्रेगुट्टा (Karregutta Tiranga Yatra) पहाड़ी लंबे समय तक नक्सलियों के कोर जोन के तौर पर पहचानी जाती रही है। घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह इलाका नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। करेगुट्टा को नक्सलियों के ‘ब्लैक फॉरेस्ट’ के नाम से भी जाना जाता था। हिड़मा, देवा, दामोदर और आजाद जैसे बड़े नक्सली कैडरों की गतिविधियों से भी इस इलाके का नाम जुड़ा रहा है।
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हथियार निर्माण और सैन्य गतिविधियों का केंद्र
बताया जाता है कि कर्रेगुट्टा (Karregutta Tiranga Yatra) क्षेत्र में नक्सलियों की हथियार निर्माण से जुड़ी गतिविधियां और संगठन की सैन्य गतिविधियां संचालित होती थीं। लंबे समय तक यह इलाका सुरक्षा बलों के लिए बेहद संवेदनशील बना रहा।
करीब एक साल पहले सुरक्षा बलों ने यहां बड़ा एंटी नक्सल ऑपरेशन चलाया था। अभियान के दौरान 31 नक्सलियों के मारे जाने और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इलाके में बड़ी संख्या में आईईडी भी बरामद किए गए थे। इसके बाद सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत की। अब इसी कर्रेगुट्टा तक तिरंगा यात्रा पहुंच रही है, जिससे इलाके की बदली तस्वीर सामने आ रही है।
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बीजापुर से कर्रेगुट्टा तक तिरंगे का सफर
तिरंगा यात्रा के अंतिम दिन बीजापुर से यात्रा शुरू होकर आवापल्ली, उसूर, गलगाम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहुंचेगी। पहाड़ी पर तिरंगा फहराने के बाद यात्रा का समापन किया जाएगा।
इस यात्रा में डिप्टी सीएम विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप समेत सैकड़ों स्थानीय लोग और पुलिस जवान शामिल हैं। इससे पहले दूसरे दिन यात्रा दंतेवाड़ा से शुरू होकर सुकमा के कई नक्सल प्रभावित इलाकों से गुजरते हुए बीजापुर पहुंची। बुरकापाल, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर और टेकलगुड़ेम जैसे इलाकों से होकर तिरंगा यात्रा आगे बढ़ी।
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बुरकापाल से टेकलगुड़ेम तक बदली तस्वीर
बस्तर के जिन इलाकों में कभी नक्सल हिंसा और सुरक्षा अभियानों की खबरें आम थीं, अब उन्हीं रास्तों से तिरंगा यात्रा गुजर रही है। स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बीच यात्रा का कर्रेगुट्टा तक पहुंचना बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
इन इलाकों में तिरंगे के साथ यात्रा का आयोजन लोगों के बीच सुरक्षा, शांति और सामान्य जीवन की वापसी का संदेश भी दे रहा है। कभी नक्सलियों के प्रभाव के लिए पहचाने जाने वाले क्षेत्रों में अब राष्ट्रीय ध्वज के साथ कार्यक्रम होना बदलते हालात की तस्वीर पेश करता है।
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कर्रेगुट्टा पर तिरंगा फहराने का खास संदेश
करेगुट्टा की पहाड़ी पर तिरंगा फहराना इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है। जिस इलाके को कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने का आयोजन सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव और बदलते माहौल का प्रतीक है।
तिरंगा यात्रा के जरिए बस्तर के दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों तक राष्ट्रीय एकता और शांति का संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कर्रेगुट्टा में तिरंगा फहराए जाने के साथ यात्रा का समापन होगा और इसी के साथ बस्तर में बदलते हालात की एक नई तस्वीर भी सामने आएगी।
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