सीजी भास्कर, 14 अगस्त। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन यानी CGMSC को टेंडर प्रक्रिया से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट (CGMSC Supreme Court) से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की ओर से निगम पर लगाए गए 1 लाख रुपये के जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CGMSC की टेंडर प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ हुई है। शीर्ष अदालत ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निगम की ओर से ऐसी कोई गलती नहीं हुई थी, जिसके लिए उस पर जुर्माना लगाया जाए।

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क्या था पूरा मामला
टेंडर प्रक्रिया से जुड़े एक विवाद में एक ठेकेदार ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CGMSC पर 1 लाख रुपये का हर्जाना लगाया था।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद CGMSC ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। निगम की ओर से अदालत के सामने टेंडर प्रक्रिया के दौरान की गई कार्रवाई और ठेकेदार को भेजी गई जानकारी से जुड़े रिकॉर्ड रखे गए।
आधिकारिक ईमेल पर भेजी गई थी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि ठेकेदार ने टेंडर प्रक्रिया के लिए जो आधिकारिक ईमेल आईडी उपलब्ध कराई थी, उसी पर निगम की ओर से जरूरी जानकारी और संदेश समय रहते भेजे गए थे।
इसके बावजूद ठेकेदार की ओर से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद टेंडर की शर्तों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे आगे की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द किया जुर्माना CGMSC Supreme Court
शीर्ष अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों पर विचार किया। अदालत ने पाया कि CGMSC ने ठेकेदार को उपलब्ध कराई गई आधिकारिक ईमेल आईडी पर समय पर जरूरी सूचना भेजी थी।
ऐसे में निर्धारित समय में जवाब नहीं देने की स्थिति में ठेकेदार को टेंडर प्रक्रिया से बाहर किया जाना नियमों के अनुरूप था। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि निगम की ओर से ऐसी कोई गलती सामने नहीं आई, जिसके आधार पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए।
इसी आधार पर शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के जुर्माने वाले आदेश को रद्द कर दिया और CGMSC को राहत दी।
टेंडर प्रक्रिया को मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CGMSC की ओर से कहा गया कि निगम आगे भी टेंडर और खरीद प्रक्रियाओं में निर्धारित नियमों का पालन करेगा।
निगम का कहना है कि पारदर्शी और नियम आधारित खरीद प्रक्रिया के जरिए राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर लगातार काम किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विवाद में CGMSC के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।
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फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हाईकोर्ट की ओर से लगाया गया 1 लाख रुपये का जुर्माना प्रभावी नहीं रहेगा। मामले में शीर्ष अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रक्रिया के आधार पर CGMSC के पक्ष में फैसला दिया है।
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