सीजी भास्कर, 14 अगस्त। बिलासपुर में एक अनपढ़ विधवा को अपने पति की पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े (Pension Case) बकाया भुगतान के लिए करीब 15 वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े। सर्विस बुक गुम होने का हवाला देकर भुगतान रोकने के मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया और राज्य शासन को कड़ी फटकार लगाई।
जशपुर की रहने वाली बैगीन बाई को हुई मानसिक प्रताड़ना के लिए कोर्ट ने 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि शासन चाहे तो यह राशि उन अधिकारियों के वेतन से वसूल सकता है, जिनकी लापरवाही के कारण महिला को इतने लंबे समय तक परेशानी उठानी पड़ी।

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पति की मौत के बाद पेंशन के लिए संघर्ष Pension Case
जशपुर जिले के ग्राम पल्लीडीह निवासी बैगीन बाई के पति शंकर साई सिदार पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग में ग्रामीण सहायक के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 11 सितंबर 2003 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन दिया था।
हालांकि, उनके आवेदन पर विभाग की ओर से कोई अंतिम निर्णय हो पाता, इससे पहले ही 4 जून 2007 को उनका निधन हो गया। पति की मृत्यु के बाद बैगीन बाई ने पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति देयकों के भुगतान के लिए विभाग के सामने आवेदन करना शुरू किया।
सर्विस बुक गुम होने का दिया हवाला
बैगीन बाई की ओर से लगातार आवेदन किए जाने के बावजूद उन्हें पेंशन और दूसरे बकाया भुगतान नहीं मिले। विभाग की ओर से सर्विस रिकॉर्ड यानी सर्विस बुक गुम होने का हवाला दिया गया।
एक अनपढ़ महिला होने के बावजूद बैगीन बाई लंबे समय तक अपने हक की रकम के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाती रहीं। विभागीय स्तर पर समाधान नहीं होने के बाद आखिरकार उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
वर्ष 2021 में बैगीन बाई ने इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिला बकाया भुगतान Pension Case
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश के बाद शासन ने बैगीन बाई के लंबित पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति देयकों का भुगतान किया।
इससे पहले हाईकोर्ट ने 27 नवंबर 2025 के आदेश में भी शासन को लंबित भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने भुगतान के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की थी।
शासन की ओर से बाद में महिला को उसके पेंशन और अन्य बकाया देयकों का भुगतान कर दिया गया।
मानसिक प्रताड़ना पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
मामले में हाईकोर्ट ने इस बात को गंभीरता से लिया कि एक विधवा को उसके वैधानिक लाभ पाने के लिए करीब 15 वर्षों तक परेशान होना पड़ा। सर्विस बुक गुम होने को आधार बनाकर जिम्मेदारी से बचने के रवैये पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
कोर्ट ने बैगीन बाई को हुई मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया है। साथ ही शासन को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वह चाहे तो क्षतिपूर्ति की रकम जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूल कर सकता है।
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लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली का रास्ता खुला
हाईकोर्ट के इस निर्देश से साफ है कि सरकारी रिकॉर्ड के गुम होने या विभागीय लापरवाही का खामियाजा किसी कर्मचारी या उसके परिवार को लंबे समय तक नहीं भुगतना चाहिए।
बैगीन बाई को आखिरकार अदालत के हस्तक्षेप के बाद पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े सभी लंबित भुगतान (Pension Case) मिल सके। अब 25 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति के जरिए कोर्ट ने लंबे समय तक चली मानसिक परेशानी के लिए भी राहत दी है।
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