रिपोर्टर – आशुतोष सिंह राजपूत
सीजी भास्कर, 07 जुलाई। गरियाबंद जिले में पिछले कुछ दिनों से स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में एक अलग तरह की हलचल देखने (Drug Awareness) को मिली। कहीं छात्र नशे के दुष्प्रभावों को समझते नजर आए तो कहीं ग्रामीणों को जागरूक किया गया। बस स्टैंड, होटल और ढाबों तक पहुंची टीमों ने लोगों से नशे से दूर रहने और समाज को सुरक्षित बनाने की अपील की।
अभियान के दौरान युवाओं और आम नागरिकों ने भी बढ़ चढ़कर भागीदारी निभाई। अधिकारियों ने लोगों को बताया कि नशा केवल व्यक्ति की सेहत ही नहीं बिगाड़ता, बल्कि परिवार, समाज और भविष्य पर भी गंभीर असर डालता है। जागरूकता कार्यक्रमों में लोगों ने सवाल पूछे और नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प भी लिया।
जिलेभर में चलाया गया जागरूकता अभियान Drug Awareness
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार पाण्डेय के निर्देश तथा जिला बाल संरक्षण अधिकारी अनिल द्विवेदी के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण इकाई, मिशन शक्ति और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम ने 17 जून से 1 जुलाई 2026 तक जिलेभर में नशा मुक्ति जनजागरूकता अभियान चलाया।
इस दौरान स्कूलों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, बस स्टैंड, होटल और ढाबों सहित विभिन्न स्थानों पर लोगों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई।
903 लोगों को किया गया जागरूक
अभियान के माध्यम से जिले के कुल 903 लोगों को जागरूक किया गया। कार्यक्रमों में युवाओं और आम नागरिकों को बताया गया कि नशे की लत से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं, पारिवारिक विवाद, अपराध, सड़क दुर्घटनाएं, आर्थिक नुकसान, शारीरिक क्षति और असमय मृत्यु जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। अधिकारियों ने लोगों से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की।
बच्चों के अधिकारों की भी दी गई जानकारी
जागरूकता अभियान के दौरान किशोर न्याय अधिनियम 2015, पॉक्सो अधिनियम 2012, बच्चों के अधिकार, गुड टच और बैड टच, बाल विवाह निषेध तथा बाल श्रम कानूनों की भी विस्तार से जानकारी दी गई।
लोगों को बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका और 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह कानूनन अपराध है। साथ ही 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से होटल, ढाबों, फैक्टरी या अन्य प्रतिष्ठानों में काम कराना भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
नशामुक्त समाज बनाने की अपील
अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि वे नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय सहयोग करें और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के प्रति सजग रहें। उन्होंने कहा कि समाज और परिवार की सहभागिता से ही नशे जैसी सामाजिक बुराई पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।



