सीजी भास्कर, 14 अक्टूबर। शारदीय नवरात्रि की दुर्गाष्टमी पर घरों और मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा के साथ हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद तैयार (Durga Ashtami) किया जाता है। कन्या पूजन में छोटी कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा और उपहार देने की भी परंपरा है। लेकिन इस खास भोग के पीछे धार्मिक आस्था के साथ खानपान से जुड़ी वजहें भी मानी जाती हैं।

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दुर्गाष्टमी पर भोग की क्या है मान्यता? Durga Ashtami
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हलवा, पूरी और काले चने मां दुर्गा को श्रद्धापूर्वक अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद प्रसाद भक्तों और कन्याओं में बांटा जाता है। इसे नवरात्रि की पूजा और व्रत के समापन की महत्वपूर्ण परंपरा माना जाता है।
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सेहत से भी जुड़ा है यह प्रसाद
खानपान के लिहाज से काले चने प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत (Durga Ashtami) हैं। सूजी के हलवे और पूरी से शरीर को ऊर्जा मिलती है। हालांकि, व्रत के बाद तला हुआ और मीठा भोजन सीमित मात्रा में खाना बेहतर रहता है।
इस तरह दुर्गाष्टमी पर हलवा, पूरी और काले चने का भोग धार्मिक आस्था, पारंपरिक खानपान और कन्या पूजन की परंपरा से जुड़ा है। भक्त इस दिन मां दुर्गा की आराधना के साथ प्रसाद बांटकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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