सीजी भास्कर, 23 जुलाई 2026 : जशपुर वनमंडल में मानव-हाथी सहअस्तित्व (Human-Elephant Coexistence) को बढ़ावा देने और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गजरथ यात्रा-2026 (Gajarath Yatra 2026) की शुरुआत की गई है। अभियान के तहत वन विभाग की टीमें विद्यालयों, ग्राम सभाओं और वन सुरक्षा समितियों तक पहुंचकर ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों को हाथियों के व्यवहार, सुरक्षा उपायों और संरक्षण के संबंध में जानकारी दे रही हैं।
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हाथी प्रभावित क्षेत्रों में चल रहा जागरूकता अभियान
जशपुर वन विभाग के अनुसार गजरथ यात्रा-2026 को हाथी प्रभावित संवेदनशील क्षेत्रों (येलो जोन) में संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य मानव-हाथी द्वंद (Human-Elephant Conflict) की घटनाओं में कमी लाना और लोगों में हाथियों को लेकर वैज्ञानिक सोच विकसित करना है।
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वन विभाग की टीमें गांवों में पहुंचकर लोगों को हाथियों के प्राकृतिक आवास, भ्रमण मार्ग, भोजन और जल स्रोतों के साथ उनके व्यवहार की जानकारी दे रही हैं। ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि हाथियों के करीब जाना, उन्हें परेशान करना या उनके रास्ते में बाधा डालना गंभीर हादसों का कारण बन सकता है।
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पिछले अभियान में 1500 से अधिक विद्यार्थियों को मिली जानकारी
वन विभाग के मुताबिक वर्ष 2025 में आयोजित गजरथ यात्रा के दौरान तपकरा वन परिक्षेत्र के 15 विद्यालयों में 1,542 विद्यार्थियों को हाथियों की जैविक और व्यवहारिक विशेषताओं के बारे में जानकारी दी गई थी।
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विद्यार्थियों को हाथियों के विचरण के दौरान सावधानी बरतने, आपात स्थिति में सुरक्षित व्यवहार करने और वन विभाग की चेतावनियों का पालन करने के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया था। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और लोगों में हाथियों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
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गांवों और समितियों को भी जोड़ा जा रहा अभियान से
इस वर्ष गजरथ यात्रा का विस्तार करते हुए जशपुर वनमंडल के विभिन्न हाथी प्रभावित वन क्षेत्रों और गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। अभियान में ग्राम सभाओं, वन सुरक्षा समितियों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीणों को शामिल किया जा रहा है। आधुनिक ऑडियो-वीडियो प्रस्तुति, पोस्टर, फ्लेक्स, मॉडल और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने के उपाय बताए जा रहे हैं।
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रात में सतर्क रहने की अपील
वन विभाग ग्रामीणों से अपील कर रहा है कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सुरक्षित स्थानों पर रहें। रात में अनावश्यक आवाजाही से बचें, खेतों और जंगलों में अकेले न जाएं तथा वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें। विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और हाथियों की पारिस्थितिकी के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। प्रश्नोत्तरी और संवाद कार्यक्रमों के जरिए बच्चों को संरक्षण के प्रति प्रेरित किया जा रहा है।
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समुदाय आधारित संरक्षण पर जोर
वनमंडलाधिकारी ने बताया कि मानव-हाथी सहअस्तित्व को मजबूत करने के लिए जनजागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है। गजरथ यात्रा केवल प्रचार अभियान नहीं, बल्कि समुदाय आधारित संरक्षण की पहल है। इस अभियान के जरिए लोगों को हाथियों के व्यवहार को समझने, जोखिम कम करने और सुरक्षित सहअस्तित्व अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि जनहानि और संपत्ति की क्षति को कम किया जा सके।
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