सीजी भास्कर, 17 जुलाई : छत्तीसगढ़ में पिछले 17 महीनों के दौरान फैक्ट्री हादसों में 196 मजदूरों की मौत हुई है। फैक्ट्री हादसा छत्तीसगढ़ (Factory Accident Chhattisgarh) का मुद्दा गुरुवार को विधानसभा में जोरदार तरीके से उठा, जहां सरकार ने मौतों के आंकड़े तो स्वीकार किए, लेकिन यह मानने से इनकार कर दिया कि हादसे सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण हुए हैं।
2025 में 122 और 2026 के पांच महीनों में 74 मौतें
विधानसभा में श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि वर्ष 2025 में फैक्ट्री हादसों में 122 मजदूरों की मौत हुई, जबकि जनवरी से मई 2026 तक 74 श्रमिकों की जान जा चुकी है। इस तरह पिछले 17 महीनों में कुल 196 मजदूरों की मौत दर्ज की गई।
Factory Accident Chhattisgarh विधानसभा में विपक्ष ने उठाए सवाल
भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर, धरमलाल कौशिक और धर्मजीत सिंह ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से कहा कि राज्य में लगातार औद्योगिक हादसे हो रहे हैं। उनका आरोप था कि कई उद्योगों में सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा, जिसके कारण बॉयलर ब्लास्ट, गैस रिसाव, लिफ्ट गिरने और फैक्ट्री ढहने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
विधायकों ने 14 अप्रैल 2026 को सक्ती जिले के सिंहितराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए बॉयलर विस्फोट का भी उल्लेख किया, जिसमें 25 मजदूरों की मौत हुई थी। इसके अलावा रायगढ़ के टारकोल प्लांट और रायपुर की स्टील फैक्ट्री में हुए हादसों का भी जिक्र किया गया।
सरकार बोली- सुरक्षा नियमों का पालन कराया जा रहा
श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने सदन में कहा कि यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी हादसे सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण हुए हैं। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग फैक्ट्री अधिनियम के तहत नियमित निरीक्षण कर रहा है और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है।
वेदांता हादसे के बाद हुई कार्रवाई
सरकार के मुताबिक वेदांता पावर प्लांट हादसे में 25 मजदूरों की मौत हुई थी, जबकि 10 लोग घायल हुए थे। इनमें से आठ मजदूर स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि दो का इलाज अभी जारी है।
तकनीकी जांच में सामने आया कि बॉयलर के भीतर अचानक दबाव (पफिंग) बनने के कारण विस्फोट हुआ। इसके बाद संबंधित बॉयलर का संचालन तत्काल बंद कराया गया और 27 जून 2026 को फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ श्रम न्यायालय में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया।
964 फैक्ट्रियों का निरीक्षण, 299 केस दर्ज
सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 में 964 फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया गया। नियमों के उल्लंघन पर 299 आपराधिक मामले दर्ज किए गए और श्रम न्यायालयों ने 4.60 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
वहीं जून 2026 तक 484 फैक्ट्रियों की जांच की गई, जिसमें 134 मामले दर्ज हुए और अदालतों ने 1.77 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
हर दो साल में होता है सेफ्टी ऑडिट
श्रम मंत्री ने बताया कि अधिक जोखिम वाली फैक्ट्रियों में हर दो वर्ष में बाहरी एजेंसी से सेफ्टी ऑडिट कराया जाता है। इसके अलावा हर वर्ष आंतरिक सुरक्षा जांच, मॉक ड्रिल और मजदूरों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक हादसों की जांच अधिकृत फैक्ट्री निरीक्षक करते हैं, इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि राज्य में औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार लापरवाह है।



