सीजी भास्कर, 14 जुलाई : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान वेदांता पावर प्लांट हादसा (Vedanta Plant Accident) का मुद्दा जोरदार ढंग से गूंजा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन से हादसे में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी को लेकर जवाब मांगा। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान डॉ. चरणदास महंत ने पिछले दो वर्षों में प्रदेश में हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं, सुरक्षा मानकों के पालन और सेफ्टी ऑडिट को लेकर सरकार से सवाल किए। उन्होंने पूछा कि जिन कारखानों में सेफ्टी ऑडिट नहीं कराया गया, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जवाब में बताया कि खतरनाक रसायनों से जुड़े कारखानों में नियमों के तहत मान्यता प्राप्त एजेंसियों से सेफ्टी ऑडिट कराया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 32 कारखानों का ऑडिट पूरा हो चुका है और जहां प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, वहां नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है।
अनिल अग्रवाल की गिरफ्तारी पर घिरी सरकार
वेदांता पावर प्लांट हादसा (Vedanta Plant Accident) का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष ने सवाल किया कि अब तक केवल कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों हुई। मंत्री ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर अन्य जिम्मेदार लोगों को भी आरोपी बनाया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जब एफआईआर में अनिल अग्रवाल का नाम दर्ज है तो उनकी गिरफ्तारी के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भविष्य में किसी औद्योगिक हादसे में कंपनी के निदेशकों के खिलाफ भी इसी तरह कार्रवाई की जाएगी या यह सिर्फ एक मामले तक सीमित रहेगा।
मुआवजे पर भी उठे सवाल
विधायक रामकुमार यादव ने हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को घोषित आर्थिक सहायता का मुद्दा (Vedanta Plant Accident) उठाया। उन्होंने कहा कि कई प्रभावित परिवारों को अब तक पूरी सहायता राशि नहीं मिली है। इस पर उद्योग मंत्री ने बताया कि कंपनी की ओर से मृतकों के आश्रितों को 35-35 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये तथा केंद्र सरकार की ओर से 2 लाख रुपये की सहायता राशि घोषित की गई है। मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर विपक्ष ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया।



