सीजी भास्कर, 9 अगस्त : छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव IAS अमित कटारिया(IAS Amit Kataria Controversy) से जुड़ा विवाद अब एक और राजनीतिक मोड़ ले चुका है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत के बाद मध्यप्रदेश की पूर्व सांसद एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री जयश्री बनर्जी ने भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। उन्होंने अमित कटारिया के खिलाफ सामने आए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
लोकसभा अध्यक्ष को भेजा शिकायत पत्र
जयश्री बनर्जी ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा अध्यक्ष (IAS Amit Kataria Controversy) को भेजे पत्र में कहा कि उन्हें मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवालद्वारा स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के खिलाफ की गई शिकायत की जानकारी मिली है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मामले में लोकसभा सचिवालय पहले ही संबंधित स्तर से तथ्यात्मक जानकारी मांग चुका है।
पूर्व सांसद ने अपने पत्र में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि आरोपों की वास्तविकता सामने आनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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108 एंबुलेंस टेंडर पर भी उठाए सवाल
जयश्री बनर्जी ने अमित कटारियाके स्वास्थ्य विभाग में कार्यकाल के दौरान 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी और अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया में लगाए गए इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा मामला होने का हवाला
पूर्व सांसदने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा सीधे आम लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी है। ऐसे में यदि टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानून और नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाए।
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बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत पर भी संज्ञान की मांग
जयश्री बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत का गंभीरता से संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को बनाए रखा जाना चाहिए।
20 मई को शुरू हुआ था विवाद
अमित कटारिया (IAS Amit Kataria Controversy) और बृजमोहन अग्रवाल के बीच विवाद की शुरुआत 20 मई 2026 को हुई थी। रायपुर सांसद ने आरोप लगाया था कि स्वास्थ्य सचिव ने फोन पर उनसे कथित तौर पर कहा था कि ‘जो करना है कर लो’। सांसद का दावा था कि जनहित से जुड़े उनके कई पत्रों और स्मरण पत्रों का लंबे समय से जवाब नहीं दिया जा रहा था। इसके बाद 21 मई को बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को शिकायत भेजी थी। उन्होंने इसे सांसद के विशेषाधिकार और केंद्र सरकार के प्रोटोकॉल से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
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लोकसभा सचिवालय ने मांगी थी तथ्यात्मक जानकारी
बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत के बाद लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक मंत्रालय से पूरे मामले पर तथ्यात्मक जानकारी मांगी थी। अब पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी के पत्र के बाद यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज
मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थीं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार पर निशाना साधा था। वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण सावने कहा था कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों का सम्मान करना चाहिए और उनकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए। अब जयश्री बनर्जी की शिकायत के बाद स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया से जुड़ा यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर फिर चर्चा का विषय बन गया है।
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