सीजी भास्कर, 9 अगस्त : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (CG High Court Salary Recovery) ने कक्षा-3 और कक्षा-4 के कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गलत वेतन निर्धारण के कारण कर्मचारी को मिली अतिरिक्त राशि की वसूली नहीं की जा सकती। खास बात यह है कि कर्मचारी ने राशि लौटाने के लिए सहमति पत्र या शपथपत्र दिया हो, तब भी वसूली को वैध नहीं माना जाएगा।
रिटायर कर्मचारी से वसूले गए थे 6.26 लाख रुपये
मामला एक रिटायर उप निरीक्षक से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के वेतन का गलत निर्धारण होने के कारण विभाग ने अतिरिक्त भुगतान बताते हुए उनसे 6 लाख 26 हजार 104 रुपये की वसूली कर ली थी। कर्मचारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर वसूली गई पूरी राशि वापस करने की मांग की।
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गलती विभाग की थी, कर्मचारी की नहीं
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि अतिरिक्त भुगतान उनकी किसी धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने या तथ्य छिपाने के कारण नहीं हुआ था। विभाग ने स्वयं वेतन का गलत निर्धारण किया था। उनका आरोप था कि राशि जमा कराने के लिए उन पर दबाव बनाया गया और कहा गया कि रकम वापस नहीं करने पर रिटायरमेंट से जुड़े बकाया लाभ रोक दिए जाएंगे। राज्य सरकार ने वसूली का बचाव करते हुए कहा कि कर्मचारी ने स्वयं सहमति पत्र दिया था और अतिरिक्त राशि वापस करने पर सहमति जताई थी। इसलिए विभाग की कार्रवाई को वैध बताया गया।
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हाईकोर्ट ने सहमति पत्र को भी नहीं माना आधार
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता कक्षा-3 पद पर कार्यरत थे और अतिरिक्त भुगतान केवल गलत वेतन निर्धारण के कारण हुआ था। सरकार की ओर से ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया गया कि कर्मचारी ने धोखाधड़ी या गलत बयानी करके अतिरिक्त राशि हासिल की थी।
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अदालत ने कहा कि कर्मचारी द्वारा सहमति पत्र देने और बाद में दबाव में राशि जमा करने की बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि राशि वापस नहीं करने पर रिटायरमेंट संबंधी बकाया लाभ रोकने की स्थिति पैदा की गई थी, तो ऐसी सहमति को वसूली का आधार नहीं बनाया जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीह समेत विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कक्षा-3 और कक्षा-4 के कर्मचारियों से गलत वेतन निर्धारण के कारण हुए अतिरिक्त भुगतान की वसूली कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी ने भले ही सहमति पत्र दिया हो, लेकिन यदि वह कक्षा-3 या कक्षा-4 की सेवा में रहा है और अतिरिक्त भुगतान उसकी किसी धोखाधड़ी या गलत जानकारी के कारण नहीं हुआ, तो उससे रकम की वसूली नहीं की जा सकती।
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6.26 लाख रुपये तीन महीने में लौटाने का आदेश
हाईकोर्ट ने वसूली की कार्रवाई को रद्द कर दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता से वसूली गई 6 लाख 26 हजार 104 रुपये की पूरी राशि तीन महीने के भीतर वापस की जाए। यह फैसला गलत वेतन निर्धारण के कारण वसूली का सामना कर रहे कक्षा-3 और कक्षा-4 कर्मचारियों के लिए अहम राहत माना जा रहा है।



