सीजी भास्कर, 04 नवंबर। अवैध शराब परिवहन के मामले में दुर्ग पुलिस और अभियोजन पक्ष की अपील पर सत्र न्यायालय ने अहम फैसला (Illegal Liquor Case) सुनाया है। अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा दोनों आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने के फैसले को निरस्त करते हुए उन्हें 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

अपील में पलटा निचली अदालत का फैसला Illegal Liquor Case
आरोपी लखन भैंसा (38 वर्ष) और ममता धमगाये (47 वर्ष), दोनों निवासी गढ़चिरौली महाराष्ट्र के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम (Illegal Liquor Case) की धारा 34(2) के तहत अवैध शराब परिवहन का अपराध दर्ज किया गया था। 31 जुलाई 2025 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दुर्ग ने साक्ष्यों के अभाव में दोनों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य शासन ने सत्र न्यायालय में आपराधिक अपील दायर की।
रासायनिक रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्ध
सत्र न्यायालय ने मामले से जुड़े समस्त दस्तावेजों, रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट, जब्त शराब के नमूनों और गवाहों के बयानों का दोबारा (Illegal Liquor Case) परीक्षण किया। साक्ष्यों को पुख्ता पाते हुए अदालत ने पूर्व आदेश को अपास्त कर दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अर्थदंड न चुकाने पर दोषियों को 6-6 माह की अतिरिक्त जेल भुगतनी होगी। साथ ही घटना में प्रयुक्त वाहन क्रमांक सीजी-08-एयू-0756 को राजसात करने की कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया गया है। इस प्रकरण में विवेचना अधिकारी उपनिरीक्षक पारस सिंह ठाकुर द्वारा संकलित साक्ष्य और अभियोजन की प्रभावी पैरवी निर्णय का मुख्य आधार बनी।


