सीजी भास्कर, 11 अगस्त : बस्तर जिले के ग्राम छिंदगांव की महिला किसान रैबाली कश्यप ने एकीकृत कृषि (Integrated Farming) को अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। जागृति महिला समूह से जुड़ी रैबाली ने पारंपरिक खेती के साथ बकरीपालन, गायपालन, मुर्गीपालन, सुगंधित धान और सब्जियों की खेती शुरू की। अलग-अलग गतिविधियों के जरिए उन्हें पूरे साल आय का जरिया मिला है।
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पांच गतिविधियों से बढ़ी आमदनी
रैबाली कश्यप ने अपनी जमीन पर एक साथ पांच कृषि गतिविधियों को अपनाया। बकरीपालन से करीब 60 हजार रुपये, मुर्गीपालन से 30 हजार रुपये, सब्जियों से 24 हजार रुपये और गायपालन से 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। वहीं सुगंधित धान की खेती से करीब 20 हजार रुपये अतिरिक्त लाभ मिल रहा है। इन सभी गतिविधियों को मिलाकर रैबाली सालाना 1.50 लाख रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं।
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खेती के साथ पशुपालन से सालभर कमाई
रैबाली ने खेती को केवल एक फसल तक सीमित रखने के बजाय पशुपालन और सब्जी उत्पादन को भी इससे जोड़ा। इससे उन्हें दूध, मांस और अंडे के साथ सुगंधित धान और हरी सब्जियों से भी आमदनी हो रही है। एकीकृत कृषि (Integrated Farming) की इस व्यवस्था से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और खेती से मिलने वाली आय के विकल्प भी बढ़े हैं।
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गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
रैबाली कश्यप की सफलता अब गांव की दूसरी महिलाओं और किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। मेहनत और योजनाबद्ध तरीके से अलग-अलग कृषि गतिविधियों को अपनाकर उन्होंने अपनी आय बढ़ाई है। वे किसानों को एकीकृत कृषि अपनाने, आय के नए साधन विकसित करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने का संदेश दे रही हैं।
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रैबाली की सफलता यह दिखाती है कि खेती के साथ पशुपालन और सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों को जोड़कर छोटे स्तर पर भी परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। एकीकृत कृषि (Integrated Farming) ग्रामीण परिवारों के लिए आय के कई स्रोत तैयार करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
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