सीजी भास्कर, नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026। देश में बारिश के पानी को सहेजने और भूजल स्तर सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर जल संरक्षण अभियान (Jal Sanrakshan Abhiyan) चलाया जा रहा है। जल संचय जन भागीदारी पहल के तहत देशभर में 1.55 करोड़ से अधिक वर्षा जल संग्रह और भूजल रिचार्ज संरचनाएं तैयार की गई हैं। इस मुहिम का उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने से रोकना और भविष्य के लिए जल उपलब्धता बढ़ाना है। अभियान में सरकार के साथ पंचायतों, शहरी निकायों, स्कूलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।
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क्या है कैच द रेन
‘कैच द रेन’ यानी बारिश का पानी जहां और जब गिरे, उसे वहीं सहेजने की पहल की शुरुआत 22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस के अवसर पर हुई थी। इसके तहत घरों, स्कूलों, कार्यालयों और आवासीय परिसरों में वर्षा जल संग्रह की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाता है। साथ ही तालाबों की सफाई, पुराने जल स्रोतों का पुनरुद्धार, रिचार्ज पिट का निर्माण और खराब पड़े बोरवेल को दोबारा उपयोगी बनाने जैसे काम किए जाते हैं। इस अभियान (Catch The Rain Campaign) का मकसद पानी की हर बूंद को सहेजना है।
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1.55 करोड़ संरचनाएं तैयार
जल संचय जन भागीदारी पहल के तहत 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम भूजल रिचार्ज और जल भंडारण संरचनाएं तैयार की गई हैं। इनके प्रभाव का आकलन करने के लिए पहले चरण में 23 लाख संरचनाओं का अध्ययन किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 31 दिसंबर 2025 के बीच इन प्रयासों से लगभग 2.43 अरब घन मीटर भूजल रिचार्ज होने का अनुमान लगाया गया।
हालांकि, भूजल स्तर में सुधार केवल रिचार्ज संरचनाओं पर निर्भर नहीं करता। बारिश की मात्रा, मिट्टी की बनावट, पानी के इस्तेमाल और संरचनाओं की स्थिति का भी असर पड़ता है। इसलिए नियमित देखभाल और निगरानी जरूरी है। यह पहल (Groundwater Recharge India) जल संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
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अभियान के दो चरण
जल संचय जन भागीदारी पहल का पहला चरण 1.0 के नाम से 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 तक लागू किया गया। इसमें समुदायों, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और लागत आधारित प्रयासों के जरिए जल संरक्षण के कार्यों को बढ़ावा दिया गया। इसके बाद 1 जून 2025 को दूसरा चरण शुरू हुआ। इसमें उन जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया जहां भूजल का अत्यधिक दोहन हुआ है या जल स्तर गंभीर स्थिति में है। स्थानीय जरूरतों के मुताबिक कम लागत वाले जल संरक्षण उपायों को प्राथमिकता दी गई। इस पहल (Jal Sanchay Jan Bhagidari) में जनभागीदारी को अहम माना गया है।
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2026 में भी जारी मुहिम
1 जून 2026 को शुरू की गई जल संचय जन भागीदारी और ‘कैच द रेन’ की संयुक्त पहल के तहत वर्षा जल संग्रह, भूजल रिचार्ज और पारंपरिक जल स्रोतों के सुधार पर जोर दिया जा रहा है। इसमें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ कार्यक्रम, जल स्रोतों के पुनरुद्धार और अन्य सरकारी योजनाओं के संसाधनों को भी जोड़ा गया है। ग्राम पंचायतों, शहरी निकायों, महिला समूहों, युवाओं और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी को अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है। जिला स्तर पर जल शक्ति केंद्र लोगों को वर्षा जल संग्रह की तकनीक और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक जल संरक्षण योजनाओं की जानकारी देने में मदद करते हैं। इस तरह (Rainwater Harvesting India) के प्रयासों से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
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