सीजी भास्कर, 28 अक्टूबर । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। खरगे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार CEC ज्ञानेश कुमार का बचाव क्यों कर रही है। (Kharge SIR Voter List Controversy)
खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि INDIA गठबंधन हर नागरिक के मतदान के अधिकार और संविधान की रक्षा के लिए अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों में मतदाता सूची से जुड़े आंकड़े भी साझा किए।
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उत्तर प्रदेश से की शुरुआत : Kharge SIR Voter List Controversy
खरगे ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में फॉर्म-8 के तहत 10,470 अनियमित बदलावों के मामले में FIR दर्ज हुई और पूरे राज्य में ऑडिट शुरू किया गया। उन्होंने MLC मतदाता सूची की 158 प्रविष्टियों में सॉफ्टवेयर के कारण नामों में गलतियां मिलने का भी उल्लेख किया।
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महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और राजस्थान के आंकड़े
खरगे के मुताबिक, महाराष्ट्र में SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.07 करोड़ नाम हटाए गए। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ दायर अपीलों में से 93 प्रतिशत सफल रहीं। वहीं, राजस्थान में भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूचियों (Kharge SIR Voter List Controversy) के बीच करीब 30 लाख विसंगतियां होने का दावा किया गया।
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गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश का भी जिक्र : Kharge SIR Voter List Controversy
खरगे ने दावा किया कि गुजरात में SIR के बाद मतदाता सूची से 68.12 लाख नाम कम हुए और पुनः पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है। कर्नाटक में नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 की 61,059 अर्जियां दाखिल होने का उल्लेख किया गया। आंध्र प्रदेश में 20,959 अर्जियों में चुनाव अधिकारियों को ही आपत्ति दर्ज कराने वाला बताया गया।
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ओडिशा, तेलंगाना और झारखंड के आंकड़े
खरगे के अनुसार, ओडिशा के धामनगर में नाम हटाने के लिए 3,000 से ज्यादा अर्जियां दाखिल हुईं, जिनके दुरुपयोग की शिकायत बूथ लेवल अधिकारियों ने की। तेलंगाना में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 73.39 लाख नाम हटाए जाने का दावा किया गया। झारखंड के चतरा विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-7 की 4,790 अर्जियां दाखिल होने की बात भी कही गई।
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हरियाणा, दिल्ली और गोवा पर भी उठाए सवाल : Kharge SIR Voter List Controversy
खरगे ने कहा कि हरियाणा में सत्यापन के लिए 44.91 लाख नोटिस जारी किए गए और 1 अक्टूबर तक 4.35 लाख मामलों में सुनवाई लंबित थी। दिल्ली में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 47.5 लाख नाम हटाए जाने का दावा किया गया। वहीं, गोवा में ECINET सिस्टम में रोलबैक की सुविधा नहीं होने के कारण 97 पात्र मतदाताओं के नाम शुरुआत में वापस नहीं जोड़े जा सके।
इन आंकड़ों के जरिए खरगे ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़े और आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जाने की जरूरत रखते हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की प्रक्रिया में संबंधित चुनाव अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
अब SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के बीच मतदाता सूची की सटीकता, शिकायतों के निपटारे और मतदान के अधिकारों की सुरक्षा पर चर्चा केंद्रित है।
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