सीजी भास्कर, 17 अप्रैल : महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पहरनादादर की रहने वाली (Livelihood Farm Pond Scheme) बिसाहिन की कहानी ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरी है। कभी केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहने वाली बिसाहिन का जीवन अनिश्चितताओं से भरा था।
बारिश समय पर न होने या कम होने की स्थिति में उनकी फसल प्रभावित होती थी, जिससे परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो जाता था। सीमित संसाधनों और अस्थिर आय के बीच जीवन संघर्षपूर्ण था, लेकिन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजना ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। शासन द्वारा स्वीकृत राशि से तैयार यह डबरी आज आजीविका डबरी योजना के सफल क्रियान्वयन का उदाहरण बन चुकी है।
शासन द्वारा तालाब निर्माण के लिए 2 लाख 74 हजार 999 रुपये की राशि स्वीकृत की गई, जिसमें से 2 लाख 49 हजार 613 रुपये की लागत से एक सुंदर सीढ़ीनुमा कृषि डबरी का निर्माण किया गया। लगभग 20×20 मीटर आकार की इस डबरी में करीब 894 घन मीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता है। यह तालाब अब जल संचयन का एक उत्कृष्ट मॉडल बन गया है और सूखे के समय में भी बिसाहिन के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा है।
जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में कुल 501 आजीविका डबरी का निर्माण किया गया है, जो इस योजना आजीविका डबरी निर्माण (Livelihood Farm Pond Scheme) के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
जीवन में आया बड़ा बदलाव
बिसाहिन बताती हैं कि डबरी बनने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। पानी उपलब्ध होते ही उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ-साथ मछली पालन की शुरुआत की। पहले जहां वे केवल एक फसल पर निर्भर थीं, अब वे मछली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इसके साथ ही अब वे रबी फसल और सब्जियों की खेती भी आसानी से कर पा रही हैं। इस बदलाव ने उनकी आय को कई गुना बढ़ा दिया है और आर्थिक स्थिरता प्रदान की है। यही वजह है कि यह योजना आजीविका सुधार योजना (Livelihood Farm Pond Scheme) अब उनके लिए सिर्फ योजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का आधार बन गई है।
रोजगार के खोले अवसर
बिसाहिन जय सतनाम महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं, जिसका संचालन लोकोस ऐप के माध्यम से होता है। समूह से जुड़कर उन्हें कम ब्याज पर ऋण मिला, जिससे उन्होंने मछली बीज और चारा खरीदा। इस पहल ने न केवल उनकी आय बढ़ाई, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर खोले हैं। चारा बनाना, जाल बुनना और तालाब किनारे सब्जी उत्पादन जैसे कार्यों से कई महिलाएं जुड़ने लगी हैं। इस पूरी प्रक्रिया में आजीविका सशक्तिकरण योजना (Livelihood Farm Pond Scheme) के जरिए सामूहिक विकास का रास्ता भी मजबूत हुआ है।
आज बिसाहिन एक साधारण किसान से आगे बढ़कर सफल उद्यमी बन चुकी हैं। उनका आत्मविश्वास और मेहनत गांव की अन्य महिलाओं को प्रेरित कर रही है। वे खुद कहती हैं कि यह तालाब उनके लिए केवल एक गड्ढा नहीं, बल्कि उनके भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद है। अब उन्हें पानी के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और मछली पालन से उनकी आय दोगुनी हो गई है।


