सीजी भास्कर, 24 जुलाई : छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के वनांचल क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं (Mahua Products Success Story) ने स्थानीय वनोपज को आजीविका का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है। मोहला विकासखंड के ग्राम रामगढ़ की मां रामेश्वरी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने महुआ के अचार और शहद निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बनाकर करीब एक लाख रुपये की आय अर्जित की है।
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बिहान योजना से मिली नई दिशा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी पहल के तहत मां रामेश्वरी स्व-सहायता समूह की महिलाओं को वित्तीय और तकनीकी सहायता मिली, जिससे उन्होंने स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर अपना व्यवसाय शुरू किया। समूह की महिलाओं ने साबित किया कि वनांचल क्षेत्रों में उपलब्ध वनोपज का बेहतर उपयोग कर रोजगार और आय के स्थायी साधन तैयार किए जा सकते हैं।
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10 महिलाओं ने मिलकर खड़ी की सफलता की मिसाल
ग्राम रामगढ़ की 10 महिलाओं ने सामूहिक प्रयास से महुआ का अचार और शहद तैयार कर बाजार में बिक्री शुरू की। पिछले एक साल में समूह ने अपने उत्पादों से करीब एक लाख रुपये की आय अर्जित की है। इस आय से महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। साथ ही उनमें आत्मविश्वास और उद्यमिता की भावना भी बढ़ी है।
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Mahua Products Success Story से बढ़ा आत्मविश्वास
समूह की सदस्य सुशीला कुरेटी ने बताया कि पहले घरेलू जरूरतों और छोटे खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब वे खुद आय अर्जित कर रही हैं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि बिहान योजना ने उन्हें केवल रोजगार नहीं दिया, बल्कि समाज में सम्मान और नई पहचान भी दिलाई है।
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स्थानीय वनोपज से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
रामगढ़ गांव की यह पहल महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का सफल उदाहरण बनकर सामने आई है। जिला प्रशासन और बिहान मिशन के सहयोग से वनांचल की महिलाओं को अपने क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों से आय अर्जित करने का अवसर मिला है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ पलायन रोकने में भी मदद मिल रही है।
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अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा Mahua Products Success Story
मां रामेश्वरी स्व-सहायता समूह की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के गांवों की महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार गतिविधियों को अपनाने के लिए आगे आ रही हैं। महुआ के अचार और शहद से शुरू हुई यह पहल अब महिला आत्मनिर्भरता और ग्रामीण उद्यमिता का प्रेरणादायक मॉडल बन रही है।



