सीजी भास्कर, 29 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के किसान अब धान के साथ-साथ नकदी फसलों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रदेश में मखाना विकास योजना का प्रभावी क्रियान्वयन शुरू हो गया है। केंद्र सरकार की ‘सेंट्रल सेक्टर स्कीम’ के तहत राज्य को 178.11 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। (Makhana Farming in Chhattisgarh) के जरिए धमतरी, बालोद, महासमुंद और गरियाबंद जिलों के किसानों की तकदीर बदलने की तैयारी है।
राष्ट्रीय मखाना बोर्ड में शामिल हुआ छत्तीसगढ़
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा के बाद राज्य में मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण (Processing) की गतिविधियों में तेजी आई है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार, वर्तमान में धमतरी जिले में महिला स्व-सहायता समूहों ने 55 एकड़ में बुवाई पूरी कर ली है। जहां पहले किसान पारंपरिक खेती तक सीमित थे, वही अब मखाना के आधुनिक माडल को अपनाकर वे अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं। (Makhana Farming in Chhattisgarh) से प्रदेश को नई पहचान मिल रही है।
प्रोसेसिंग से मिलेगा 1000 रुपये तक का भाव
मखाना की खेती की सबसे बड़ी खासियत इसका बाजार भाव है। ओजस फार्म की संचालक मनीषा चंद्राकर के मुताबिक, छत्तीसगढ़ की जलवायु मखाना के लिए बेहद अनुकूल है। यदि किसान केवल बीज न बेचकर उसका प्रसंस्करण और पैकेजिंग खुद करे, तो बाजार में इसकी कीमत 700 से 1000 रुपये प्रति किलो तक मिल सकती है। यहां आरंग के लिंगाडीह में स्थापित पहला प्रसंस्करण केंद्र राज्य के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बना हुआ है। (Makhana Farming in Chhattisgarh) अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़े बिजनेस के रूप में उभर रहा है।
133 हेक्टेयर में मखाना उत्पादन का लक्ष्य
योजना के तहत कुल 133.862 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना उत्पादन प्रस्तावित है। इसमें किसानों के पुराने तालाबों के साथ-साथ उनकी निजी भूमि पर भी खेती की जाएगी। इसके अलावा, कृषि एवं उद्यानिकी विश्वविद्यालयों में 15 हेक्टेयर में उन्नत बीज उत्पादन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वहां तैनात विभागीय अधिकारी अब किसानों को ट्रेनिंग देकर इस तकनीक को घर-घर तक पहुंचाने में जुटे हैं। (Makhana Farming in Chhattisgarh) के लिए वर्ष 2026-27 हेतु 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कार्ययोजना भी तैयार की गई है।


